धनराज पिल्लै: चार ओलंपिक खेलने वाले एकमात्र भारतीय हॉकी खिलाड़ी

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नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। धनराज पिल्लै को भारतीय हॉकी इतिहास के सर्वकालिक बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। धनराज ने बतौर खिलाड़ी और कप्तान भारतीय हॉकी को गर्व के पल दिए हैं।

धनराज का जन्म 16 जुलाई 1968 को खड़की, पुणे (महाराष्ट्र) में एक तमिल परिवार में हुआ था। ‘खड़की’ को ‘हॉकी का गढ़’ कहा जाता है, जहां धनराज पिल्लै के पिता नागालिंगम पिल्लै ग्राउंड्समैन थे। धनराज का बचपन हॉकी के इर्द-गिर्द ही घूमता रहा। शाम को वह अक्सर बच्चों को हॉकी खेलते देखा करते। धनराज के बड़े भाई रमेश और अनंत हॉकी खिलाड़ी थे। बड़े भाइयों की वजह से ही धनराज की भी दिलचस्पी इस खेल में बढ़ी और उन्होंने इस खेल को सीखने और कुछ बड़ा करने का ठान लिया।

शुरुआत में हॉकी स्टिक खरीदने के लिए उनके परिवार के पास पैसे नहीं थे। वह पुराने स्टिक से अभ्यास करते थे। वह अपने भाई की मदद से मुंबई आ गए और एक क्लब की टीम में शामिल हो गए। मुंबई की ओर से खेलते हुए धनराज पिल्लै ने कई पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील किया। इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए साल 1989 में धनराज पिल्लै ने भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया।

पिल्ले ने 1989 से 2004 के बीच भारतीय हॉकी टीम के लिए 339 मैच खेले और 170 गोल किए। हालांकि कहीं, कहीं उनके अंतरराष्ट्रीय गोलों की संख्या 171 भी बताई जाती है।

1990 से 2000 तक भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे धनराज पिल्ले की कप्तानी में भारतीय टीम ने 1998 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक और 2003 में आयोजित एशिया कप जीता था। उन्हें जर्मनी के कोलोन में आयोजित 2002 चैंपियंस ट्रॉफी में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार दिया गया था।

भारतीय हॉकी के इतिहास में धनराज पिल्लै एकमात्र खिलाड़ी हैं जिन्होंने चार ओलंपिक (1992, 1996, 2000 और 2004), चार विश्व कप (1990, 1994, 1998, 2002), चार चैंपियंस ट्रॉफी (1995, 1996, 2002, 2003) और चार एशियाई खेल (1990, 1994, 1998, 2002) खेले हैं। वह बैंकॉक एशियन गेम्स में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी भी थे और सिडनी में 1994 के वर्ल्ड कप के दौरान वर्ल्ड इलेवन टीम में शामिल होने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी थे।

2004 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया था। धनराज को 1999-2000 में खेल के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘खेल रत्न’ से सम्मानित किया गया था। 2001 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

–आईएएनएस

पीएके

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