UP:केंद्र की मंजूरी के बावजूद आलू खरीद में देरी, किसानों को नुकसान

केंद्र सरकार ने दी है निर्धारित दर पर 20 लाख टन आलू खरीद की अनुमतिसात दिन गुजरने के बाद भी न क्रय केंद्र खुले और न शुरू हुई खरीदकीमतें गिरने से नुकसान झेल रहे आलू उत्पादक किसानों को केंद्र सरकार ने तो राहत देने का रास्ता खोल दिया है, परंतु प्रदेश के उद्यान विभाग की सुस्ती इसमें रोड़ा बनी हुई है।

केंद्र ने बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत प्रदेश सरकार को 20 लाख टन आलू खरीदने की अनुमति दी है। 650 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों से आलू खरीदने के लिए 203.15 करोड़ रुपये भी आवंटित कर दिए हैं, परंतु इसके सात दिन गुजरने के बाद भी उद्यान एक क्रय केंद्र भी शुरू नहीं कर पाया है।

इस साल आलू उत्पादक किसानों को फसल के दाम कम मिलने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके चलते ही केंद्र ने 18 अप्रैल को यह निर्णय लिया है। इसके बाद उद्यान विभाग को आलू उत्पादक क्षेत्राें में क्रय केंद्रों का संचालन कर खरीद करनी है।सूत्रों के अनुसार, उद्यान विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश मंडी परिषद, यूपी एग्रो, उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिक सहकारी विपणन संघ (हाफेड) और पीसीएफ के माध्यम से खरीद कराई जानी है। वर्तमान में प्रदेश में 2363 शीतगृह संचालित हैं, जिनकी भंडारण क्षमता 202.99 लाख टन है।

इस साल 6.98 लाख हेक्टेयर में आलू की बोआई हुई थी और लगभग 253 लाख टन उत्पादन हुआ है। वर्तमान में लगभग 90 प्रतिशत आलू आलू शीतगृहों में भंडारित हो चुका है। ऐसे में सरकारी क्रय केंद्र खुलने पर भी किसानों की कम संख्या में पहुंचने की बात कही जा रही है, वहीं जो कीमत सरकार ने तय की है, उससे भी किसानों को बहुत अंतर नहीं पड़ेगा।

हालांकि, इस स्थिति के बाद भी खरीद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। मामले में निदेशक उद्यान बीपी राम ने बताया कि खरीद के संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है, जल्द ही क्रय केंद्रों का संचालन शुरू हो जाएगा।

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