नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। फिच ग्रुप की कंपनी बीएमआई (बीएमआई) के अनुमान के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों और पश्चिम एशिया संकट के असर के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने की संभावना है। यह देश की पिछले 10 वर्षों की औसत विकास दर से अधिक है और इससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
बीएमआई का यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत विकास दर के अनुमान के अनुरूप है।
गौरतलब है कि भारत ने वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज की थी।
बीएमआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “आगे देखें तो, हम वित्त वर्ष 2026-27 में 6.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि की उम्मीद करते हैं। हमारा अनुमान वित्त वर्ष 2025-26 की 7.7 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना में कम है, लेकिन पिछले दशक की भारत की औसत 6.1 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर से अधिक है।”
बीएमआई ने चालू वित्त वर्ष में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि के लिए तीन प्रमुख कारण बताए हैं।
पहला, पिछले वर्ष लागू किए गए जीएसटी सुधारों का घरेलू खपत पर पड़ा सकारात्मक प्रभाव अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। सितंबर 2025 में लागू जीएसटी सुधारों के कारण वित्त वर्ष 2026 की दिसंबर तिमाही में खपत में तेज उछाल देखा गया था। इसके बाद मार्च तिमाही में वार्षिक आधार पर खपत वृद्धि दर 1.1 प्रतिशत अंक घटकर 7.1 प्रतिशत रह गई।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई बढ़कर 5.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जिसका कारण आपूर्ति शृंखला में संभावित बाधाएं हैं, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में व्यवधान की आशंका। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं।
बीएमआई का मानना है कि बढ़ती महंगाई घरेलू खपत को प्रभावित कर सकती है और आर्थिक वृद्धि पर दबाव बना सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान निवेश वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है।
हालांकि, बीएमआई के अनुसार इसका मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संभावित 50 आधार अंकों (बेसिस प्वाइंट्स) की ब्याज दर वृद्धि नहीं है, क्योंकि उसका वास्तविक असर वित्त वर्ष 2027-28 में अधिक दिखाई देगा।
बीएमआई ने कहा कि 2025 के दौरान आरबीआई द्वारा की गई 125 आधार अंकों की ब्याज दर कटौती के कारण अल्पकालिक ब्याज दरें अभी भी अपेक्षाकृत कम हैं। इससे मौजूदा ऊर्जा संकट के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, चालू कैलेंडर वर्ष में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की विनिमय दर लगभग 95.1 के स्तर पर रह सकती है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 2025 में डॉलर के मुकाबले औसतन 87 रुपए के स्तर से रुपए में आई कमजोरी भारतीय निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाएगी। इससे ईरान संकट और व्यापारिक शर्तों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव की भरपाई करने में मदद मिल सकती है और आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिलेगा।
–आईएएनएस
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