चुनाव याचिकाओं के निपटारे में देरी से पाकिस्तान की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उठे सवाल

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इस्लामाबाद, 17 मई (आईएएनएस)। पाकिस्तान की नेशनल और प्रांतीय असेंबली में कई जनप्रतिनिधियों
के चुनाव की वैधता पर अब तक सवाल बने हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव ट्रिब्यूनल तय समय के अंदर चुनाव याचिकाओं पर फैसला नहीं दे पाए।

चुनावी विवादों का निष्पक्ष और समय पर समाधान करने के लिए ये ट्रिब्यूनल बनाए गए थे। बिजनेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट में कहा गया क‍ि इलेक्शन्स एक्ट के मुताबिक ट्रिब्यूनल को 180 दिनों के भीतर याचिकाओं का फैसला करना होता है, लेकिन अप्रैल 2026 तक कुल 374 याचिकाओं में से 128 लंबित थीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि इन मामलों के निपटारे में इतनी देरी होने से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। साथ ही संसद और विधानसभाओं की ओर से लिए गए फैसलों और संवैधानिक प्रक्रियाओं की वैधता पर भी सवाल उठने लगते हैं। हाल के समय में हुए बड़े संवैधानिक बदलावों को देखते हुए यह मामला और भी गंभीर माना जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया क‍ि संवैधानिक संशोधनों की वैधता चुने हुए प्रतिनिधियों की निर्विवाद स्थिति पर निर्भर करती है। अगर कई विधायकों की कानूनी स्थिति ही विवादित बनी रहे, तो संसद की ओर से लिए गए फैसलों की नैतिक और राजनीतिक मजबूती पर सवाल उठना स्वाभाविक है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कानून में ऐसी देरी रोकने के लिए प्रावधान मौजूद हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने उन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया। कानून के तहत बार-बार तारीख लेने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यहां तक कि अगर कोई निर्वाचित प्रतिनिधि जानबूझकर मामले को लंबा खींचता पाया जाए, तो उसकी विधानसभा सदस्यता भी निलंबित की जा सकती है।

फ्री एंड फेयर इलेक्शन नेटवर्क (एफएएफईएन) के मुताबिक अब तक किसी भी सदस्य को निलंबित नहीं किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पंजाब में पारदर्शिता को लेकर चिंता और बढ़ गई, क्योंकि ट्रिब्यूनल ने याचिकाओं और फैसलों से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए।

इससे आम लोगों, राजनीतिक दलों और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को ट्रिब्यूनल के फैसलों की जांच करने का मौका नहीं मिलता। ऐसी गोपनीयता अटकलों को बढ़ावा देती है और चुनावी व न्यायिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर शक को और मजबूत करती है।”

लगातार कई आम चुनावों के बाद भी इसी तरह की देरी देखने को मिल रही है, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ रहा है। चुनाव खत्म होने के काफी समय बाद भी तनाव बना रहता है।

–आईएएनएस

एवाई/वीसी

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