बिहार: ईंधन की किल्लत के खिलाफ 2 अप्रैल को सभी प्रखंड मुख्यालयों में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन


पटना, 28 मार्च (आईएएनएस)। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम के निर्देश पर एलपीजी की भारी किल्लत, पेट्रोल-डीजल एवं बिजली की दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के खिलाफ राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों में आंदोलन चलाया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने बताया कि आम जनता महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत से त्रस्त है। रसोई गैस की उपलब्धता में भारी कमी और पेट्रोल-डीजल व बिजली की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है, लेकिन केंद्र सरकार इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

इसी को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि 2 अप्रैल 2026 को राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर कांग्रेसजनों द्वारा व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा तथा प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने सभी जिला प्रभारियों, जिला अध्यक्षों, कार्यकारी अध्यक्षों तथा प्रदेश पदाधिकारियों से आग्रह किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संगठित कर बड़ी संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करें।

राजेश राम ने कहा कि जब तक आम जनता को एलपीजी, महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की किल्लत से राहत नहीं मिलती, तब तक पार्टी जनता की आवाज बनकर संघर्ष करती रहेगी।

इससे पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र पर पिछले 11 वर्षों में पेट्रोल और डीजल पर करों के माध्यम से बड़े पैमाने पर ‘लूट’ का आरोप लगाया।

बेंगलुरु स्थित केपीसीसी कार्यालय में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि केंद्र ने 2014 से पेट्रोल और डीजल पर करों से 43 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए हैं, जो उनके अनुसार लगभग 1,000 करोड़ रुपए प्रतिदिन के बराबर है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कमी की हालिया घोषणा के बावजूद, आम आदमी को कोई वास्तविक राहत नहीं मिलेगी, और दावा किया कि यह कदम निजी तेल कंपनियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्पाद शुल्क में कमी एक छल है। सरकार इसे राहत के रूप में पेश कर रही है, लेकिन इसका लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंचेगा। इसके बजाय, इससे निजी तेल कंपनियों को 3.6 लाख करोड़ रुपए की वार्षिक शुल्क छूट मिलेगी।

–आईएएनएस

एमएस/


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