नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया, उस समय मंदिर पूरी तरह तैयार नहीं हुआ था। हिंदू धार्मिक परंपराओं और शास्त्रों के अनुसार किसी अर्धनिर्मित मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा या उद्घाटन करना उचित नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि इसी कारण इस विषय पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सुखदेव भगत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के मुद्दे का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की। उनका कहना है कि जल्द श्रेय लेने की होड़ में अधूरे मंदिर में ही प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन कर दिया गया।
रामलला की मूर्ति के रंग को लेकर पूछे गए सवाल पर सुखदेव भगत ने कहा कि हिंदू परंपरा में भगवान राम का वर्णन अक्सर ‘श्याम वर्ण’ या ‘नील मेघ’ के समान किया गया है, इसलिए वे मूर्ति के रंग को विवाद का विषय नहीं मानते। उन्होंने कहा कि मूर्ति का रंग नहीं, बल्कि भगवान के प्रति श्रद्धा और आस्था अधिक महत्वपूर्ण है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर परिसर में कथित चोरी या अनियमितताओं की खबरें सामने आई हैं, जो बेहद दुखद हैं। उनके अनुसार, सरकार की जिम्मेदारी है कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े स्थानों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि यदि किसी ट्रस्ट या उससे जुड़े लोगों पर अनियमितताओं के आरोप लगते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर ट्रस्टों के कामकाज की समय-समय पर जांच होनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार के दुरुपयोग की आशंका न रहे।
वहीं, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और अपने बयान पर स्वयं स्पष्टीकरण देने में पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए वे इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं पर मनीष तिवारी ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण का मार्ग उच्चतम न्यायालय के फैसले से प्रशस्त हुआ था, इसलिए यदि किसी प्रकार के आरोप सामने आते हैं तो उनकी जांच भी निष्पक्ष और विश्वसनीय तरीके से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति गठित कर मामले की जांच कराई जाए, ताकि तथ्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके और किसी तरह का संदेह न रहे।
इसी दौरान मनीष तिवारी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा भारत-पाकिस्तान वार्ता की मांग पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड भरोसेमंद नहीं रहा है। पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है। तिवारी ने कहा कि हाल के वर्षों में हुए आतंकी हमलों को इतनी जल्दी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों के लिए पूरी तरह रोकने की ठोस गारंटी नहीं देता, तब तक बातचीत का आधार क्या होगा।
उन्होंने कहा कि अतीत में भी पाकिस्तान के नेताओं और सैन्य शासकों ने भारत को कई आश्वासन दिए, लेकिन वे उन पर खरे नहीं उतरे, इसलिए भारत की प्राथमिकता आतंकवाद पर रोक होनी चाहिए।
–आईएएनएस
पीआईएम/डीकेपी
