ढाका, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश में 2024 के जुलाई विरोध प्रदर्शनों के बाद से लेकर पूर्व अंतरिम सरकार के अंतिम चरण तक देशभर में 97 दरगाहों और मजारों पर हमले हुए हैं। इन घटनाओं में तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट और संगठित हमले शामिल हैं, जिससे दंडमुक्ति की बढ़ती संस्कृति को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है।
ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, ताजा मामला 18 अप्रैल का है, जब कुस्टिया जिले के दौलतपुर उपजिला में एक धार्मिक स्थल पर हमला किया गया। इस दौरान आध्यात्मिक नेता शमीम रेजा की पिटाई कर धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। बताया गया कि यह हमला धार्मिक ईशनिंदा की अफवाहों के बाद भड़का था।
रिपोर्ट में आंकड़ों के हवाले से कहा गया है कि करीब 100 घटनाओं के बावजूद केवल 12 मामलों में ही औपचारिक केस दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुस्टिया की घटना भी शामिल है। अधिकांश मामलों की जांच में अब तक बहुत कम प्रगति हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में न तो बड़ी गिरफ्तारियां हुई हैं और न ही कोई ठोस न्यायिक कार्रवाई, जिससे दरगाहों पर हमलों को लेकर दंडमुक्ति की संस्कृति मजबूत होने की आशंका बढ़ी है।
रिपोर्ट में अगस्त 2024 से इस वर्ष 11 अप्रैल तक देशभर में दरगाहों पर 100 से अधिक हमले, तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाओं का भी जिक्र किया गया है, जिससे प्रभावित इलाकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी (एचआरएसएस) के अनुसार, इन घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि महिलाओं सहित 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
सूफी परंपरा पर शोध करने वाले संगठन ‘मकाम’ के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया कि 8 अगस्त 2024 से दिसंबर 2025 के बीच केवल ढाका डिवीजन के विभिन्न जिलों में 50 से अधिक दरगाहों पर हमले दर्ज किए गए।
इनमें नारायणगंज में सबसे अधिक 11 घटनाएं हुईं, जबकि ढाका में नौ मामले सामने आए। किशोरगंज, मानिकगंज, तंगाइल, गाजीपुर और राजबाड़ी समेत कई जिलों में भी घटनाएं दर्ज की गईं। इन हमलों में दो लोगों की मौत हुई और महिलाओं सहित करीब 180 लोग घायल हुए।
रिपोर्ट के अनुसार, चिटगांव डिवीजन में कुल 27 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 17 कुमिल्ला, चार चिटगांव, तीन नोआखाली, दो ब्राह्मणबारिया और एक कॉक्स बाजार में हुईं। सीताकुंड और हाथहजारी जैसे इलाकों की कई ऐतिहासिक दरगाहों में भी तोड़फोड़ की गई।
ढाका के पास धमराई उपजिला में अंतरिम सरकार के कार्यकाल के दौरान तीन दरगाहों पर हमले हुए। हालांकि तीन मामले दर्ज किए गए, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। इनमें से एक दरगाह में गतिविधियां फिर शुरू हो गई हैं, जबकि दो अब भी बंद हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश में ऐसी घटनाएं धार्मिक वैचारिक मतभेद, सामाजिक असहिष्णुता, अफवाहों के आधार पर भीड़ जुटना, राजनीतिक प्रभाव और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई जैसे कारणों से हो रही हैं। उनका मानना है कि जांच, गिरफ्तारी और अभियोजन में सुस्ती ने दंडमुक्ति की धारणा को और मजबूत किया है।
–आईएएनएस
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