गुवाहाटी, 3 जुलाई (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि स्कूल स्तर पर शुरू की गई एंटरप्रेन्योरशिप ट्रेनिंग से छात्रों को प्रैक्टिकल स्किल्स विकसित करने में मदद मिल रही है और उन्हें कम उम्र से ही स्वरोजगार के अवसरों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने एक ऐसे छात्र की सफलता की कहानी का उदाहरण दिया, जिसने ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लेने के बाद मशरूम की खेती शुरू की।
सोशल मीडिया पर यह कहानी शेयर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि युवा पीढ़ी उद्यमिता और इनोवेशन की ताकत का इस्तेमाल करने के लिए तैयार रहे।
उन्होंने कृष्णज्योति नाम के एक छात्र के सफर का जिक्र किया, जिसने अपने स्कूल में आयोजित एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने के बाद मशरूम की खेती शुरू की।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस पहल ने छात्र को मशरूम की खेती शुरू करने के लिए प्रेरित किया और तब से वह इसे सफलतापूर्वक कर रहा है।
शर्मा ने लिखा, “उनके स्कूल में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम ने कृष्णज्योति को मशरूम की खेती शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।”
उन्होंने कहा कि एंटरप्रेन्योरशिप से इतनी जल्दी जुड़ने से छात्र बिजनेस के मौकों को समझ सकेंगे, प्रैक्टिकल जानकारी हासिल कर सकेंगे और पढ़ाई के साथ-साथ अपना बिज़नेस शुरू करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा सकेंगे।
उन्होंने कहा, “शुरुआत में मिली यह बढ़त बच्चों को कम उम्र से ही उद्यमों को समझने और आगे बढ़ाने में मदद करेगी और आखिरकार असम के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी।”
असम सरकार युवाओं को आय बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से कई पहलों के जरिए कौशल विकास, इनोवेशन और उद्यमिता पर ज्यादा जोर दे रही है।
अधिकारियों ने बताया कि एग्रीकल्चर, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम की खेती और इससे जुड़े दूसरे कामों जैसे सेक्टर में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को एजुकेशनल संस्थानों में बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि छात्रों को प्रैक्टिकल अनुभव मिल सके और साथ ही उन्हें स्वरोजगार के मौकों के बारे में जानकारी दी जा सके।
राज्य सरकार का मानना है कि स्कूली छात्रों में उद्यमिता की सोच को बढ़ावा देने से न केवल भविष्य में नौकरी देने वाले तैयार होंगे, बल्कि स्थानीय प्रतिभा और इनोवेशन पर आधारित एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम बनाकर असम में ग्रामीण आजीविका, टिकाऊ खेती और समग्र आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा।
–आईएएनएस
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