प्रदेश सरकार शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के मानकों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्ताव के तहत जिन इलाकों में अभी सीवर और जलापूर्ति की पाइपलाइन नहीं डाली गई है, वहां केवल इंटरलाकिंग सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि पाइपलाइन डालने पर सड़क न तोड़नी पड़े। जैसे ही इन क्षेत्रों में पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी, वहां सीसी रोड बनाई जाएगी।सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से सड़क बनने के बाद बार-बार खुदाई की समस्या खत्म होगी और सरकारी धन की भी बचत होगी। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क बनने के बाद सीवर या पानी की लाइन डालने के लिए उसे तोड़ना पड़ता है, जिससे संसाधनों की बर्बादी होती है।
शहरी क्षेत्रों में डार्क स्पाट और ब्लैक स्पाट की पहचान भी की जाएगी। वहीं, पारंपरिक स्पीड ब्रेकर की जगह स्पीड टेबल बनाने पर जोर दिया गया है, ताकि खासकर बुजुर्गों और आम लोगों को आवागमन में दिक्कत न हो।
नगर विकास विभाग जल्द ही इन नए मानकों के आधार पर निकायों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा। इससे न केवल सड़क निर्माण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी, बल्कि जिन क्षेत्रों में अभी तक सड़कें नहीं बनी हैं, वहां भी काम तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
