नई दिल्ली, 20 फरवरी (आईएएनएस)। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अपनी 27वीं बैठक शुक्रवार को आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता राजेश वर्मा, चेयरपर्सन, सीएक्यूएम ने की। बैठक में प्रमुख एजेंडा आइटम्स पर विस्तृत चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता में सुधार लाना और मॉनिटरिंग को मजबूत बनाना है।
बैठक में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आदेशों के अनुसार डॉ. एस.डी. अत्री को सीएक्यूएम के फुल-टाइम टेक्निकल मेंबर के रूप में पुनः नियुक्त करने पर सहमति जताई गई। डॉ. अत्री के पास पर्यावरण विज्ञान, वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग और मॉडलिंग में 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जो आयोग के तकनीकी कार्यों को मजबूती प्रदान करेगा।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों (डब्ल्यू.पी. (सी) संख्या 1135/2020) के अनुपालन में, आईआईटी, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य विशेषज्ञों के 33 सदस्यीय पैनल द्वारा तैयार रिपोर्ट पर विचार किया गया। यह रिपोर्ट 2015-2025 के स्रोत विभाजन अध्ययन (सोर्स अपोर्टियनमेंट) के मेटा-विश्लेषण पर आधारित है। रिपोर्ट में पीएम2.5 को दिल्ली के एक्यूआई को प्रभावित करने वाला प्रमुख प्रदूषक बताया गया है। इसमें स्थानीय उत्सर्जन और सीमा पार प्रभाव दोनों पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट पर प्राप्त सुझावों पर विचार किया जा रहा है, जो नीतिगत फैसलों में सहायक होंगे।
आयोग ने दिल्ली-एनसीआर में कंटीन्यूअस एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन्स (सीएएक्यूएमएस) नेटवर्क को मजबूत करने की मंजूरी दी। ग्रिड-बेस्ड स्पेशल कवरेज, शहरी निकटता, भूमि उपयोग, सेकेंडरी पार्टिकुलेट्स और जनसंख्या घनत्व के आधार पर कुल 46 नए स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके अंतर्गत दिल्ली में 14, हरियाणा में 16, राजस्थान में 1 और उत्तर प्रदेश में 15 स्टेशन स्थापित होंगे। इससे क्षेत्र में सीएएक्यूएमएस की कुल संख्या 157 हो जाएगी, जिससे मॉनिटरिंग घनत्व बढ़ेगा और प्रदूषकों तथा बेसलाइन एयर क्वालिटी का बेहतर आकलन संभव होगा।
बैठक में 13 फरवरी 2026 के डायरेक्शन नंबर 96 पर भी चर्चा हुई, जिसमें 2026 में गेहूं की पराली जलाने को रोकने और समाप्त करने के लिए राज्य एक्शन प्लान को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया। निर्माण और विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन तथा धूल नियंत्रण प्रोटोकॉल को मजबूत करने के ड्राफ्ट डायरेक्शन नंबर 97 को सदस्यों के कमेंट्स के बाद मंजूरी दी गई। इसी तरह, दिल्ली-एनसीआर की इंडस्ट्रीज के लिए अधिक सख्त पीएम एमिशन स्टैंडर्ड तय करने वाले ड्राफ्ट डायरेक्शन नंबर 98 को भी स्वीकृति मिली।
आयोग ने एनफोर्समेंट टास्क फोर्स (ईटीएफ) की कार्रवाइयों, यूनिट्स के बंद/शुरू होने के स्टेटस और ग्रैप ऑर्डर्स की समीक्षा की। एमसीडी टोल प्लाजा पर भीड़भाड़ कम करने के लिए आरएफआईडी और एएनपीआर तकनीकों से एकीकृत मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) सिस्टम के शीघ्र कार्यान्वयन पर बल दिया गया। सीएक्यूएम ने 2026 के लिए राज्य-स्तरीय और शहर-स्तरीय वार्षिक कार्य योजनाओं की समीक्षा की, जो परिवहन, उद्योग, धूल शमन, अपशिष्ट प्रबंधन और बायोमास जलाने जैसे क्षेत्रों में संरचनात्मक उपायों पर केंद्रित हैं।
–आईएएनएस
एससीएच
