देहरादून, 12 मई (आईएएनएस)। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ने नीट परीक्षा रद्द होने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए छात्रों और एग्जाम सिस्टम पर इसके प्रभाव को लेकर चिंता जताई।
रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “नीट परीक्षा रद्द करके सरकार ने बहुत बड़ा और अच्छा फैसला लिया है, क्योंकि मुझे लगता है कि यह लगभग 23 लाख छात्रों के भविष्य का सवाल था। अगर परीक्षा रद्द नहीं की जाती तो जिन छात्रों ने ईमानदारी से मेहनत की थी, उनके साथ धोखा हो जाता। राजस्थान में पेपर लीक का खुलासा हो गया है, और जो लोग फर्जी प्रश्नपत्रों के जरिए ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं, वे निश्चित रूप से पकड़े जाएंगे और बच नहीं पाएंगे।”
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नागरिकों से ईंधन बचाने और सोने की खरीदारी से बचने के आग्रह पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण राष्ट्रहित में है और इसके परिणाम दूर-दूर तक देखे जा सकते हैं। जब भी देश में कोई संकट आया हो, चाहे युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर या उससे पहले, प्रधानमंत्री ने पूरे देश से आह्वान किया, पूरा देश उनके साथ खड़ा रहा।”
बता दें कि नीट परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न एग्जाम होने से पहले ही लीक होने की बात सामने आई थी। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा से जुड़े सारे दस्तावेज एवं अन्य जानकारियां सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत करेगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 3 मई को हुई नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को रद्द करने और परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है। इस परीक्षा में इस वर्ष लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एजेंसी ने कहा कि यह निर्णय भारत सरकार की मंजूरी के बाद लिया गया है। एजेंसी के अनुसार, 8 मई को परीक्षा से जुड़े मामलों को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों ने इस संबंध में जानकारी साझा की थी।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों व कानून प्रवर्तन संस्थाओं से प्राप्त जांच रिपोर्टों तथा तथ्यों की समीक्षा की गई है। प्राप्त रिपोर्ट व सूचनाओं और निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को बरकरार रखना उचित नहीं होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए नीट की परीक्षा दोबारा करवाना अनिवार्य हो गया। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा रद्द की गई है, इसलिए अब विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।
–आईएएनएस
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