बीटी में हिस्सेदारी बढ़ाने के सुनिल मित्तल के कदम का ब्रिटिश सरकार विरोध कर सकती है : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 28 मई (केसरिया न्यूज़)। यूके के टेलीकॉम ग्रुप बीटी में सुनिल मित्तल के नेतृत्व वाले भारती एटरप्राइजेज की ओर से हिस्सेदारी बढ़ाने के फैसले का ब्रिटिश सरकार विरोध कर सकती है। इसकी वजह महत्वपूर्ण राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे पर संप्रभु नियंत्रण बनाए रखने से संबंधित चिंताएं सामने आना है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में मामले से जुड़े लोगों का हवाला देते हुए कहा गया है कि ब्रिटिश सरकार भारती द्वारा ब्रिटिश दूरसंचार ऑपरेटर में अपनी हिस्सेदारी को मौजूदा स्तर से आगे बढ़ाने के किसी भी कदम का विरोध करेगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले पर मित्तल के प्रवक्ता और बीटी ने फिलहाल को बयान जारी नहीं किया।

यह घटनाक्रम उन रिपोर्टों के सामने आने के कुछ दिनों बाद आया है जिनमें कहा गया था कि भारती एंटरप्राइजेज बीटी में अपनी हिस्सेदारी को उस सीमा से थोड़ा नीचे तक बढ़ाने की संभावना तलाश रही है, जिससे कंपनी के लिए अनिवार्य अधिग्रहण प्रस्ताव शुरू हो जाएगा।

भारती एंटरप्राइजेज बीटी में हिस्सेदारी फिलहाल 24.95 प्रतिशत है। हालांकि, भारती के एक प्रवक्ता ने पहले कहा था कि कंपनी अपनी मौजूदा हिस्सेदारी से संतुष्ट है और फिलहाल अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

पिछले साल सितंबर में, भारती एंटरप्राइजेज के फाउंडर और चेयरमैन सुनील भारती मित्तल और भारती एयरटेल के वाइस चेयरमैन और एमडी गोपाल विट्टल, गैर-स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में बीटी बोर्ड में शामिल हुए थे।

इस महीने की शुरुआत में, मित्तल ने कहा था कि उनका इरादा अगले दशक में धीरे-धीरे नेतृत्व की जिम्मेदारियां अगली पीढ़ी को सौंपने का है, साथ ही उन्होंने भारती टेलीकॉम को बहुमत हिस्सेदारी हासिल करने को भी प्राथमिकता बताया था।

नतीजों के बाद कंपनी की कॉन्फ्रेंस कॉल में मित्तल ने कहा, “जैसे-जैसे मैं उस मुकाम पर पहुंचता हूं जहां मैं अगली पीढ़ी और शेयरधारकों को बागडोर सौंपता हूं, भारती टेलीकॉम को 51 प्रतिशत या 50 प्रतिशत से थोड़ी अधिक नियंत्रणकारी शेयरधारिता हासिल कर लेनी चाहिए।”

–केसरिया न्यूज़

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