'ब्रह्मोस' भारत को एक प्रमुख रक्षा-हथियार निर्यातक के रूप में आगे बढ़ा रहा है : रिपोर्ट


नई दिल्ली, 18 मई (आईएएनएस)। भारत तेजी से दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातक देशों की कतार में अपनी जगह मजबूत कर रहा है और इस सफर में ब्रह्मोस मिसाइल देश की बढ़ती सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर उभरी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता और खासकर ग्लोबल साउथ देशों तक बढ़ती पहुंच ने ‘डिफेंस आत्मनिर्भरता’ को नई मजबूती दी है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति भी लगातार मजबूत हो रही है।

‘इंडिया नैरेटिव’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा निर्यात अब भारत की विदेश नीति का एक अहम हथियार बन चुका है। भारत खुद को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी शक्ति के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ अपने कूटनीतिक प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को भी मजबूत कर रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही भरोसा जता चुके हैं कि वर्ष 2030 तक भारत का रक्षा निर्यात 50 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। जैसे-जैसे भारत का रक्षा बाजार बढ़ रहा है, वैसे-वैसे देश उन क्षेत्रों में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो उसकी रणनीतिक और भू-राजनीतिक सोच के अनुरूप हैं। खासकर ग्लोबल साउथ अब भारत की रणनीतिक नीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्यात इस दिशा में सबसे बड़ा गेमचेंजर बनकर सामने आ रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के संबंधों में तेजी से बदलाव आया है और अब यह क्षेत्र भारत के लिए नए रक्षा बाजार के रूप में उभर रहा है।

रूस के साथ मिलकर विकसित की गई ब्रह्मोस मिसाइल अपनी तेज रफ्तार, सटीक निशाना साधने की क्षमता और बहुउपयोगी तकनीक के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह मिसाइल जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से भी लॉन्च की जा सकती है। इसकी गति मैक 2.8 से मैक 3 के बीच है, जो दुनिया की कई पारंपरिक क्रूज मिसाइलों से कहीं ज्यादा तेज मानी जाती है। यह 400 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण चीन सागर क्षेत्र के देश जैसे फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया अपनी सुरक्षा और रक्षा क्षमता बढ़ाने में जुटे हैं। चीन के आक्रामक नौसैनिक रवैये और क्षेत्रीय दावों को देखते हुए ये देश अपनी ‘एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल’ यानी ए2/एडी क्षमता मजबूत करना चाहते हैं और ब्रह्मोस इसमें बड़ी भूमिका निभा सकता है।

इंडोनेशिया को भी ब्रह्मोस मिसाइल का संभावित खरीदार बताया गया है। वहीं, वियतनाम के साथ भी ब्रह्मोस सौदे पर चर्चा चल रही है। इस साल मई में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम की भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी।

फिलीपींस 2024 में ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला पहला देश बना था। भारत ने अप्रैल 2025 में फिलीपींस को दूसरी खेप भी सौंप दी।

इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वियतनाम और दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं। उन्होंने कहा है कि उनका फोकस रणनीतिक सैन्य सहयोग बढ़ाने, रक्षा उद्योग साझेदारी मजबूत करने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने पर रहेगा, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे।

–आईएएनएस

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