गणेश दामोदर सावरकर की जयंती पर नितिन गडकरी समेत भाजपा नेताओं ने दी श्रद्धांजिल

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नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। प्रसिद्ध क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर के बड़े भाई गणेश दामोदर सावरकर (बाबा सावरकर) की जयंती पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई भाजपा नेता ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, “वीर सावरकर के बड़े भाई क्रांतिकारी गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन।”

महाराष्ट्र भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने एक्स पर लिखा, “स्वातंत्र्यवीर सावरकर के ज्येष्ठ भ्राता, महान स्वतंत्रता सेनानी गणेश दामोदर (बाबाराव) सावरकर को उनकी जयंती पर विनम्र अभिवादन। उन्होंने ‘अभिनव भारत’ संगठन की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा इस संगठन के माध्यम से तत्कालीन जनमानस में स्वतंत्रता की चेतना और क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित की। अंडमान की सेल्युलर जेल में काला पानी की सजा भुगतते हुए उन्होंने असहनीय यातनाएं सहीं, लेकिन राष्ट्रसेवा के अपने संकल्प से कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने विपुल लेखन के माध्यम से मराठी साहित्य को भी समृद्ध किया। उनका त्याग, संघर्ष, विचार और व्यक्तित्व सदैव देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, “महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राष्ट्रभक्त एवं क्रांतिकारी विचारक गणेश दामोदर सावरकर जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उनका त्याग, संघर्ष और समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।”

बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट किया, “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी, महान क्रांतिकारी एवं हिन्दू महासभा के सह-संस्थापके श्री गणेश दामादर सावरकर जी की जयंती पर कोटि कोटि नमन।”

गौरतलब है कि गणेश दामोदर सावरकर का जन्म 13 जून 1879 में महाराष्ट्र राज्य के नासिक नगर के निकट भागपुर नामक स्थान में हुआ था। नासिक में ही उनकी शिक्षा हुई। आरंभ में उनकी रुचि धर्म, योग, जप, तप आदि विषयों की ओर थी। 1897 में प्लेग आफीसर रेंड के अत्याचारों से क्रुद्ध चापेकर बंधुओं ने उसकी हत्या की और उससे पूरे महाराष्ट्र में हलचल मच गई तो गणेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। एक बार तो वे सन्न्यास लेने की सोचने लगे थे, लेकिन प्लेग में पिता की मृत्यु हो जाने से छोटे भाईयों की शिक्षा-दीक्षा आदि का दायित्व आ जाने से उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी।

–आईएएनएस

ओपी/पीएम

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