भाजपा ने वर्षों की रणनीति से बंगाल में सरकार बनाई: मोहम्मद सलीम


नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण और तमिलनाडु, केरल में जारी सियासी अनिश्चितता को लेकर सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने टिप्पणी की। उन्होंने इन तीनों राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए विभिन्न दलों की रणनीति और परिस्थितियों पर सवाल उठाए।

पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने पर सलीम ने कहा कि इतनी कोशिश और मेहनत के बाद जब भाजपा को सरकार मिली है, तो उनके नेताओं को शपथ ग्रहण जैसे कार्यक्रमों में शामिल होना ही चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे साल चुनाव में व्यस्त रहते हैं, इसलिए जब चुनाव का परिणाम आता है तो उसमें उनकी मौजूदगी भी जरूरी हो जाती है। सलीम ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सत्ता इतनी आसानी से नहीं आई है। उन्होंने कहा कि इसके लिए लंबे समय तक राजनीतिक परिस्थितियों को तैयार किया गया। उनके मुताबिक, पहले तृणमूल कांग्रेस को मजबूत किया गया और बाद में परिस्थितियां इस तरह बनाई गईं कि भाजपा को फायदा मिले। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में सरकार बनाने के लिए कई वर्षों की राजनीतिक रणनीति शामिल रही है।

केरल में सरकार गठन को लेकर जारी असमंजस पर सलीम ने कहा कि यह मुख्य रूप से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के अंदरूनी मामलों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अक्सर नेतृत्व को लेकर निर्णय हाईकमान पर छोड़ दिया जाता है, जिससे देरी और असमंजस की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने आगे कहा कि यूडीएफ के भीतर ही कई तरह के मतभेद हैं, जिससे सरकार गठन में दिक्कतें सामने आ रही हैं।

वहीं, तमिलनाडु में जारी सियासी खींचतान पर सलीम ने कहा कि यह सिर्फ पॉलिटिकल ड्रामा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई स्तरों पर गतिविधियां चल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि इसमें एनआरआई, बड़े कारोबारी और विभिन्न राज्यों के प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं, जो सरकार बनने या उसे रोकने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम ऐसे आए हैं कि विजय को अकेले पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, लेकिन वह सबसे बड़ी पार्टी के नेता हैं और उन्हें अन्य दलों का समर्थन मिल रहा है। सलीम ने बताया कि वामपंथी दलों ने भी उन्हें समर्थन दिया है और संख्या जुटाने की प्रक्रिया जारी है।

सलीम ने आगे कहा कि जब एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल जाता है, तब भी मंत्रिमंडल गठन में समय लगता है, लेकिन जहां गठबंधन की सरकार होती है, वहां यह प्रक्रिया और जटिल हो जाती है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल के गठन में सीमित संख्या से शुरुआत की गई, जिससे यह साफ है कि राजनीतिक संतुलन बनाना आसान नहीं होता।

–आईएएनएस

पीएसके


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