उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शोध कर रहे शिक्षकों को राहत देते हुए रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) योजना के नियमों को सरल बना दिया है।
इससे तकनीकी कारणों से खारिज होने वाले शोध प्रस्तावों की संख्या कम होगी और शिक्षकों को प्रक्रिया में ज्यादा लचीलापन मिलेगा।दरअसल, अब तक कई शोध प्रस्ताव केवल इसलिए निरस्त हो जाते थे क्योंकि सह-प्रमुख शोधकर्ता पहले से किसी अन्य प्रोजेक्ट में शामिल होता था या प्रस्ताव में उसका नाम नहीं होता था। विशेषज्ञ समितियां इन कारणों से प्रस्तावों को मंजूरी नहीं देती थीं।
नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि कोई भी शिक्षक (प्रमुख शोधकर्ता) एक समय में केवल एक ही शोध परियोजना संचालित कर सकेगा। इससे एक साथ कई प्रोजेक्ट संभालने की स्थिति खत्म होगी और गुणवत्ता सुधरेगी।
वहीं, पहले जहां बड़ी परियोजना का अनुभव जरूरी था, अब उसकी जगह कम से कम दो छोटी परियोजनाओं का अनुभव अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही 15 वर्ष का शोध अनुभव होना भी जरूरी रहेगा।
सबसे अहम बदलाव सह-शोधकर्ताओं को लेकर है। अब यदि किसी सह-शोधकर्ता के पास पहले से कोई प्रोजेक्ट चल रहा है, तो उसे बदला जा सकेगा। इसके अलावा, जिन प्रस्तावों में सह-शोधकर्ता का नाम नहीं है, उनमें बाद में सह-शोधकर्ता जोड़ा भी जा सकेगा।
