Sunday, February 22, 2026

दक्षिणी सीमा पर प्रवासियों की संख्या नियंत्रित करने के आदेश पर बाइडेन ने किया हस्ताक्षर


वाशिंगटन, 5 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिया है जिसमें यह प्रावधान है कि यदि दक्षिणी सीमा पार कर अवैध रूप से देश में आने वाले शरणार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो उनके आवेदन तत्काल खारिज किये जा सकते हैं।

बाइडेन प्रशासन इस प्रावधान पर लंबे समय से विचार कर रहा था। समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह तब लागू होगा जब अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर प्रवेश के बंदरगाहों के बीच अवैध क्रॉसिंग का सात दिन का औसत 2,500 तक पहुंच जाएगा। ऐसी स्थिति में सीमा प्रभावी रूप से बंद कर दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि अवैध क्रॉसिंग का स्तर पहले की तय सीमा से अधिक है। अधिकारियों ने एक प्रेस वार्ता के दौरान संवाददाताओं को बताया कि ऐसे में आदेश तुरंत प्रभावी हो सकता है, जिससे सीमा अधिकारियों को “कुछ दिनों या घंटों के भीतर” प्रवासियों को वापस भेजने का अधिकार मिल जाएगा।

अब तक अमेरिका में शरण चाहने वाले एक अवैध अप्रवासी को आम तौर पर देश में अस्थायी रूप से प्रवेश करने की अनुमति दी जाती थी। वह अपने आवेदन के समर्थन में तर्क देने के लिए अदालत में पेश होने का इंतजार करता था।

नए नियम के तहत, लगातार सात दिन तक दैनिक क्रॉसिंग 1,500 या उससे कम रहने के दो सप्ताह बाद शरणार्थियों के लिए सीमा फिर से खुल जाएगी।

अकेले बच्चों और मानव तस्करी के शिकार लोगों को नए नियमों के दायरे से बाहर रखा गया है। राष्ट्रपति बाइडेन ने इसे मानवीय विचारों से प्रेरित बताया। हालांकि, कुछ लोगों को आशंका है कि इस छूट से उन बच्चों की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है जो खुद सीमा तक खतरनाक यात्रा करते हैं।

बाइडेन ने व्हाइट हाउस में कार्यकारी आदेश की घोषणा करते हुए मंगलवार को कहा कि उनके उपाय, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच कई सप्ताह की बातचीत का नतीजा हैं। कांग्रेस के कुछ जीओपी सदस्यों द्वारा विरोध किया गया था क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति और उनके चुनावी प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रम्प ने “उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था”।

बाइडेन ने ट्रम्प के बारे में कहा कि वह “अवैध आव्रजन के मुद्दे को सुलझाना नहीं चाहते थे”। राष्ट्रपति ने कहा, “वह इसका इस्तेमाल मुझ पर हमला करने के लिए करना चाहते थे।”

–आईएएनएस

एकेजे/


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