कोलकाता, 19 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार ने सिद्धांततः यह फैसला लिया है कि वह जल्द ही दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (डीवीआरआरसी) में अपना प्रतिनिधि फिर से नियुक्त करेगी। इससे पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार ने समिति से अपना प्रतिनिधित्व वापस ले लिया था।
सितंबर 2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर डीवीआरआरसी से राज्य का प्रतिनिधित्व वापस लेने की जानकारी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) मानसून के दौरान राज्य सरकार को पूर्व सूचना दिए बिना बांधों से पानी छोड़ रहा है, जिससे दक्षिण बंगाल के कई इलाके जलमग्न हो गए।
उस समय भाजपा और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने इस फैसले की आलोचना की थी। मंत्रालय का कहना था कि डीवीसी जलाशयों से पानी छोड़ने का निर्णय डीवीआरआरसी की बैठक में चर्चा के बाद लिया जाता है, जिसमें राज्य सरकार का प्रतिनिधि भी शामिल होता है; इसलिए, बिना सूचना पानी छोड़े जाने का आरोप निराधार है।
नवान्न सचिवालय के एक सूत्र के मुताबिक, “अब केंद्र और पश्चिम बंगाल में एक ही दल की सरकार होने के कारण डीवीसी के साथ टकराव का दौर खत्म हो गया है। इसी वजह से राज्य सरकार ने मानसून से पहले डीवीआरआरसी में अपना प्रतिनिधि भेजने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जल्द औपचारिक घोषणा की जाएगी।”
सूत्र ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से राज्य के बिजली और सिंचाई विभाग को डीवीसी के साथ समन्वय बनाकर काम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के रूप में 2011 से 2026 तक अपने कार्यकाल में ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रही थीं कि बाढ़ का पानी छोड़ने जैसे महत्वपूर्ण फैसले केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राज्य सरकार से सहमति लिए बिना एकतरफा तरीके से किए जाते हैं।
उन्होंने कई बार यह भी कहा था कि डीवीसी राज्य सरकार के अनुरोधों और सुझावों की अनदेखी करते हुए बिना पूर्व सूचना अपने जलाशयों से पानी छोड़ देता है।
हालांकि अब नई सरकार ने राज्य में बाढ़ की स्थिति रोकने के लिए टकराव के बजाय डीवीसी के साथ सहयोग की नीति अपनाने का फैसला किया है।
–आईएएनएस
डीएससी
