वाशिंगटन, 12 मई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस हफ्ते चीन के दौरे पर जाएंगे और प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। इस बीच, अमेरिका के सीनेटरों के एक समूह ने शी जिनपिंग के साथ होने वाली मीटिंग से पहले ट्रंप से ताइवान के लिए 14 बिलियन डॉलर के हथियार पैकेज पर आगे बढ़ने की अपील की है। इसके साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि ताइपे के लिए अमेरिकी समर्थन में कोई भी कमी बीजिंग के हौसले को बढ़ावा देगी और हिंद-प्रशांत को अस्थिर करेगी।
सीनेट की विदेश संबंध समिति की वरिष्ठ सदस्य सीनेटर जीन शाहीन और सीनेटर थॉम टिलिस के नेतृत्व में लिखे गए एक पत्र में सीनेटरों ने सरकार से आग्रह किया है कि वह लंबे समय से लंबित हथियार बिक्री पैकेज को लेकर कांग्रेस को औपचारिक जानकारी दी जाए। उनका कहना है कि इस पैकेज को जनवरी 2025 में ही मंजूरी मिल चुकी थी।
सीनेटरों ने लिखा, “हम आपकी सरकार से जोर देकर कहते हैं कि वह ताइवान को अमेरिका के 14 बिलियन डॉलर के हथियार बेचने के बारे में औपचारिक तौर पर बताए, जिसे कांग्रेस ने जनवरी 2025 में पहले से मंजूरी दे दी थी।”
सीनेटरों ने कहा कि ताइवान के लेजिस्लेटिव युआन ने बीजिंग के बढ़ते मिलिट्री दबाव के बीच आइलैंड की सेल्फ-डिफेंस क्षमताओं को मजबूत करने के मकसद से 25 बिलियन डॉलर के मजबूत स्पेशल डिफेंस बजट को मंजूरी दी है।
लेटर के मुताबिक, ताइवान का नया डिफेंस खर्च “अमेरिका द्वारा दिए गए डिफेंसिव हथियारों पर खर्च होगा। इसमें काउंटर-ड्रोन एसेट्स, एक इंटीग्रेटेड बैटल कमांड सिस्टम और मीडियम-रेंज म्यूनिशन शामिल हैं।”
सीनेटर्स ने ट्रंप को शी के साथ व्यापार या भू-राजनीतिक बातचीत के दौरान ताइवान को फायदे के तौर पर इस्तेमाल न करने के लिए भी आगाह किया।
सीनेटर्स ने लिखा, “आपको बीजिंग को यह साफ कर देना चाहिए कि जब आप आर्थिक स्तर पर बराबरी करना चाहते हैं, तो ताइवान के लिए अमेरिकी समर्थन पर बातचीत नहीं हो सकती।”
लेटर पर डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन सीनेटरों ने हस्ताक्षर किए थे, जिनमें क्रिस कून्स, जॉन कर्टिस, टैमी डकवर्थ, जैकी रोसेन, एंडी किम और एलिसा स्लोटकिन शामिल थे, जो ताइवान की सिक्योरिटी के लिए कांग्रेस में दोनों पार्टियों के समर्थन को दिखाते हैं।
सीनेटरों ने कहा कि अमेरिका के साथ ताइवान की रक्षा साझेदारी ने चीनी सैन्य एक्शन के खिलाफ एक असरदार बचाव का काम किया है, जो दुनिया को एक खतरनाक युद्ध में धकेल देगा। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पैकेज में ड्रोन, एंटी-शिप मिसाइल, रडार सिस्टम और माइंस शामिल हैं, जिनका मकसद चीनी हमले को बहुत महंगा बनाना है।
सीनेटरों ने कहा कि ताइवान के नेताओं ने रक्षा खर्च बिल पास करने के लिए “बीजिंग के लगातार और खुले दबाव को पार कर लिया है और वाशिंगटन से भी ऐसा ही इरादा दिखाने की अपील की है।
पत्र में कहा गया, “जैसे ताइवान के नेताओं ने अपने लोगों की रक्षा के लिए एकता दिखाई, वैसे ही हमें भी अपने राष्ट्रीय हितों के लिए जरूरी अमेरिकी हथियारों की पेंडिंग बिक्री को आगे बढ़ाना चाहिए।”
सीनेटरों ने इस मुद्दे को अमेरिकी परिवारों के लिए आर्थिक नजरिए से भी देखा और चेतावनी दी कि ताइवान के खिलाफ चीन का कोई भी कदम दुनिया भर में अस्थिरता पैदा करेगा।
उन्होंने लिखा, “ऐसी दुनिया में जहां बीजिंग ताइवान पर कंट्रोल पाने के लिए पक्का कदम उठाता है, अमेरिकी परिवारों को बहुत ज्यादा और लंबे समय तक महंगाई, सप्लाई चेन में रुकावटों का सामना करना पड़ेगा, जिससे देश में मैन्युफैक्चरिंग की नौकरियां खत्म हो जाएंगी और रहने का खर्च बहुत बढ़ जाएगा।”
यह लेटर ऐसे समय में आया है जब व्यापार, तकनीक पर रोक, ताइवान स्ट्रेट में मिलिट्री गतिविधि और हिंद प्रशांत में असर को लेकर वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव बना हुआ है। चीन ने कई बार स्वशासित ताइवान को अपने कंट्रोल में लाने की बात कही है। चीन ने जरूरत पड़ने पर ताइवान को जबरदस्ती शामिल करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि, ताइवान हमेशा से ही खुद को एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर देश मानता है और दुनिया के सामने यही कहता है।
–आईएएनएस
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