पाक आर्मी के लिए बलूचिस्तान बना नासूर, इलाके में पूरी ताकत झोंकने के बावजूद मुनीर की सेना हुई कमजोर

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नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान में इस वक्त कई मोर्चों पर हिंसक घटनाएं देखने को मिल रही हैं। एक मोर्चे पर सीमा पार अफगानिस्तान के साथ तनाव, दूसरे मोर्चे पर पीओके और तीसरे मोर्चे पर बलूचिस्तान में बलूच लोगों के साथ पाकिस्तानी सेना के टकराव की स्थिति बनी हुई है।

पिछले कुछ महीनों में, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को कई हमलों में भारी नुकसान हुआ है। पाकिस्तानी सेना के जनरल हेडक्वार्टर को ऐसे ऑपरेशन शुरू किए, जिन्हें बड़े पैमाने पर और इंटेलिजेंस पर आधारित बताया गया।

पाकिस्तान की सुरक्षा बल और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मिलकर ‘ऑपरेशन शाबान’ शुरू किया, जो 6 जुलाई को जियारत में मांगी डैम पंपिंग स्टेशन पर एक पुलिस पोस्ट पर बलूच विद्रोहियों के हमले के जवाब में था।

वहीं, बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने उसी समय ‘ऑपरेशन अल-अज्म’ शुरू किया। लेकिन, इससे साफ हो गया कि प्रांत में पाकिस्तानी सेना की यूनिट्स बहुत कमजोर हो चुकी है।

पाकिस्तानी सेना की तरफ से हाल के कुछ महीनों में जिस तरह की कार्रवाई की गई, जिसमें बलूचिस्तान के लोगों को जबरन गायब करना, न्यायेतर हत्याएं आदि शामिल हैं, बावजूद इसके बलूच लड़ाकों ने कड़ा मुकाबला किया है। बलूच के लोगों ने मुश्किल हमलों को कोऑर्डिनेट करने की अपनी क्षमता के साथ ही अपनी पहुंच और काबिलियत दिखाई।

हालांकि, पाकिस्तान की लगभग सभी केंद्रीय और राजकीय सुरक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियों की बलूचिस्तान में अच्छी-खासी मौजूदगी है। आर्मी, वायु सेना, नौसेना और कोस्ट गार्ड समेत पाकिस्तान सेना की सभी ब्रांच बलूचिस्तान में मौजूद हैं, जिसमें आर्मी सबसे अहम है।

पश्चिमी बलूचिस्तान में मौजूद ग्वादर का डीप-वॉटर पोर्ट प्राइमरी बेस के तौर पर काम करता है और कराची के बाद पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा पोर्ट है। इस पोर्ट पर पाकिस्तान कोस्ट गार्ड की तीसरी बटालियन भी है। तीन छोटे नेवल बेस पासनी, ओरमारा और जिवानी में हैं। इसके अलावा, पाकिस्तानी इंटेलिजेंस सिस्टम भी बड़े पैमाने पर तैनात है। ऑपरेशन के अलावा, इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट (आईएसआई) स्ट्रेटेजिक इंटेलिजेंस के लिए जिम्मेदार है और क्वेटा में इसकी अच्छी-खासी मौजूदगी है।

पाकिस्तानी सरकार, बड़ी संख्या में सेना की तैनाती के बावजूद, बलूचिस्तान के बड़े हिस्सों पर किसी भी तरह का नियंत्रण बनाए रखने के लिए हमेशा संघर्ष करती है। बहुत ज्यादा प्राकृतिक संसाधन होने के बावजूद, बलूचिस्तान की ज्यादातर आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। इससे वहां के लोगों में पाकिस्तानी सरकार के प्रति गहरा गुस्सा पैदा हो गया है।

बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तानी सरकार को लुटेरा मानते हैं, जो उनकी प्राकृतिक संसाधनों का शोषण कर रहे हैं और इसे एक कॉलोनी की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। बलूच समाज में पाकिस्तान विरोधी भावना इतनी प्रबल है कि सेना के लिए स्थानीय लोगों से बलूच लड़ाकों के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी जुटाना लगभग असंभव है। सटीक जमीनी जानकारी के बिना कोई भी सैन्य अभियान असफल होना तय है।

–आईएएनएस

केके/एबीएम

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