पुलिस ने जांच पूरी कर आइपीसी की धारा 171 जी 505 (1) बी और 125 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए थे। इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चली। कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए दो साल कैद और ढाई हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
