Monday, February 16, 2026

50 की उम्र में लीसा रे ने बदली 'बीच बॉडी' की परिभाषा, बोलीं- 'अब मंजूरी नहीं, आजादी जरूरी'


मुंबई, 4 फरवरी (आईएएनएस)। फिल्म और फैशन की दुनिया में फिटनेस और लुक्स काफी मायने रखते हैं। ऐसे में एक्ट्रेसेस के लिए उम्र बढ़ने के साथ यह दबाव और भी बढ़ता जाता है, लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी हैं, जिन्होंने इन दबावों को नहीं माना और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती हैं। अभिनेत्री लीसा रे उन्हीं में से एक हैं। 50 साल की उम्र में उन्होंने ‘बीच बॉडी’ की सोच को नए मायने दिए हैं और इसे आत्मस्वीकृति, आजादी और आत्मसम्मान से जोड़कर देखा है।

लीसा रे ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर बीच से अपनी कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के कैप्शन में उन्होंने लिखा, ”एक समय था जब बीच पर खूबसूरत दिखने का मतलब एक तय इमेज से जोड़ा जाता था, रेड स्विमसूट, रेड लिपस्टिक और हर हाल में परफेक्ट दिखने का दबाव। साल 1991 के ग्लैडरैग्स कवर ने मेरी यही छवि लोगों के मन में बसा दी थी और इसी छवि के सहारे मैंने अपना करियर भी बनाया। लेकिन, आज मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने आज रखती है।”

उन्होंने आगे लिखा, ”शरीर समय के साथ बदला है, जिंदगी में उतार-चढ़ाव आए हैं, बीमारियों से लड़ी हूं और खुद को फिर से खड़ा किया है। अब दूसरों की मंजूरी से ज्यादा सुकून अपने आप को स्वीकार करने में मिलता है। उन असंभव सुंदरता मानकों से बाहर निकलना ही मुझे असली राहत है। ये मानक महिलाओं के लिए बनाए ही ऐसे गए थे कि उन्हें पूरा करना मुश्किल लगता है।”

लीसा रे ने हॉलीवुड अभिनेत्री पामेला एंडरसन का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “पामेला कभी रेड स्विमसूट में दिखाई देने वाली सबसे बड़ी फैंटेसी मानी जाती थीं। लेकिन आज वह खुद उस छवि को तोड़ चुकी हैं और अपनी पहचान खुद गढ़ रही हैं।”

लीसा ने कहा, ”मुझे ग्लैमर या मेकअप से कोई परेशानी नहीं है। शूट, रील्स और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए सजना-संवरना मजेदार लगता है। बीच मेरे लिए वह जगह है, जहां मैं पूरी तरह नेचुरल रहना चाहती हूं।”

उन्होंने कहा, ”1990 के दशक में सनस्क्रीन का ज्यादा चलन नहीं था। मैं कई बार धूप में बुरी तरह झुलसी हूं। आज उसकी छाप मेरी त्वचा पर दिखती है। लेकिन यह मेरी कमजोरी नहीं है। यह सब उनकी जिंदगी का हिस्सा है और मैं इसके साथ पूरी तरह सहज हूं।”

–आईएएनएस

पीके/एबीएम


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