Wednesday, January 14, 2026

बीएमसी चुनाव में उत्तर भारतीय महायुति के पक्ष में वोट करेंगे: अपर्णा यादव


मुंबई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। बीएमसी चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने राज ठाकरे को निशाने पर लेते हुए कहा कि उत्तर भारतीयों के बारे में जो वे कहते हैं, उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए। चुनाव में भाषा की मर्यादा नहीं भूलनी चाहिए। बीएमसी चुनाव में उत्तर भारतीय करारा जवाब देंगे और बीएमसी चुनाव में महायुति के पक्ष में वोट करेंगे।

मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में बीएमसी चुनाव को लेकर यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने कहा कि मैं यहां प्रचार करने आई थी और मैंने बहुत अच्छा माहौल देखा। लोगों में खासकर महिलाओं की भागीदारी पर मैंने विशेष ध्यान दिया। हर रैली में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं। महायुति के प्रति उनका समर्थन बहुत मजबूत है। मुंबई के मेयर उम्मीदवार का फैसला एक साथ मिलकर लिया जाएगा, हम इसे सही समय पर ही लेंगे। लेकिन मुझे विश्वास है कि नेतृत्व जो भी फैसला लेगा, मुंबई को ऐसा मेयर मिलेगा जो विकास की राजनीति करेगा।

उन्होंने कहा कि बीएमसी चुनाव में महायुति की जीत तय है। हमारे मुद्दे विकास के हैं और महायुति का वादा विकास के दम पर है। मूलभूत सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है। बीएमसी चुनाव जीतने के बाद हर कॉर्पोरेटर जनता की समस्याओं का समाधान करेगा।

राज ठाकरे को लेकर अपर्णा यादव ने कहा कि वे उत्तर भारतीयों के प्रति जो जहरीले बयान देते रहते हैं, उन पर कंट्रोल करना चाहिए। यह बहुत चिंता की बात है। असली बालासाहेब की पार्टी शिंदे की शिवसेना है। उत्तर भारतीय लोग बीएमसी चुनाव में भी मुंहतोड़ जवाब देंगे। चुनाव में उत्तर भारतीय महायुति के पक्ष में वोट करेंगे।

केजीएमयू विवाद को लेकर अपर्णा यादव ने कहा कि मेरा मानना है कि महिला आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार ने बहुत सख्त कार्रवाई की है। मैं मुख्यमंत्री योगी को दिल से धन्यवाद देती हूं, क्योंकि पुलिस के माध्यम से महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं।

पीएम मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 से जब भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता संभाली और हमारे सम्मानित प्रधानमंत्री ने पद संभाला है, तब से उन्होंने एक ही सिद्धांत का पालन किया है, ‘सबका साथ, सबका विकास’। आप देखेंगे कि देश में जो अंदरूनी झगड़े चल रहे थे, वे काफी कम हो गए हैं।

–आईएएनएस

डीकेएम/डीएससी


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