Wednesday, January 28, 2026

अनामिका जैन अंबर ने यूजीसी कानून को बताया एकतरफा, कहा- सच की सुनवाई जरूरी


मेरठ, 28 जनवरी (आईएएनएस)। प्रसिद्ध कवयित्री और लेखिका अनामिका जैन अंबर ने यूजीसी कानून पर अपनी राय रखते हुए कहा कि कोई भी कानून तभी न्यायपूर्ण माना जा सकता है, जब उसमें दोनों पक्षों को बराबरी से सुना जाए।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर किसी एक पक्ष की सुनवाई ही न हो और दूसरे पक्ष की बात पहले से ही मान ली जाए, तो इसे न्याय नहीं कहा जा सकता।

अनामिका जैन अंबर ने आईएएनएस से कहा कि किसी भी फैसले की बुनियाद पूर्वाग्रह नहीं, बल्कि तर्क और साक्ष्य होनी चाहिए। कभी भी किसी निर्णय को पहले से तय मानकर नहीं लिया जाना चाहिए। हर मामले में सच को सामने आने का पूरा मौका मिलना चाहिए, तभी न्याय की असली भावना पूरी होती है।

यूजीसी के नए कानून को लेकर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इस कानून में सवर्ण वर्ग की सुनवाई का कोई प्रावधान नहीं दिखता।

उन्होंने कहा, “आप कुछ भी कहें, लेकिन एक्ट तो एक्ट की तरह ही लागू होगा और सजा भी उसी के आधार पर मिल जाएगी। अगर सुनवाई का मौका ही नहीं है, तो यह एकतरफा व्यवस्था बन जाती है।”

कवयित्री ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि किसी एक वर्ग को खुश करने के लिए दूसरे वर्ग के साथ अन्याय करना सही नहीं है। अनामिका जैन ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के खिलाफ बोलना नहीं है। उन्होंने कहा कि ओबीसी, एससी और एसटी समुदायों को भी न्याय मिलना चाहिए और मिलना भी जरूरी है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर किसी मामले में शिकायत या एफआईआर दर्ज होती है, तो उसमें सभी पक्षों की सुनवाई बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, “अगर सच को सामने आने का मौका ही नहीं दिया जाएगा, तो यह पहले से तय हो जाएगा कि गलती किसकी है। ऐसे में न्याय की भावना ही खत्म हो जाती है।”

अनामिका जैन अंबर ने बताया कि इसी कारण उन्होंने यूजीसी के इस कानून का विरोध किया है। उन्होंने इसे एकतरफा कानून बताते हुए कहा कि जब सच की सुनवाई नहीं होती, तो वह व्यवस्था न्याय नहीं, बल्कि केवल फैसला सुनाने की प्रक्रिया बन जाती है।

–आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम


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