अल नीनो की आहट के बीच श्रीलंका ने किसानों को सलाह, पानी का सावधानी से करें इस्तेमाल


कोलंबो, 11 जून (आईएएनएस)। अल नीनो से पड़ने वाले दुष्प्रभाव की आशंका के चलते श्रीलंका ने किसानों को पानी का उपयोग बेहद सावधानी से करने की सलाह दी है। देश के कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में वर्षा में कमी और सूखे जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

कृषि मंत्रालय के महानिदेशक तुषारा विक्रमाराच्ची ने किसानों से एहतियात के तौर पर कम अवधि में तैयार होने वाली फसल की खेती करने का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा कि किसानों को याला कृषि मौसम के दौरान खेती को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जल संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए और कृषि अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

कृषि विभाग ने बताया कि वह मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और परिस्थितियों में बदलाव होने पर किसानों को आवश्यक सलाह दी जाएगी।

इससे पहले बुधवार को मौसम विज्ञान विभाग के कार्यवाहक महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने कहा था कि यदि अल नीनो विकसित होता है, तो जुलाई और अगस्त में श्रीलंका में सामान्य से काफी कम वर्षा हो सकती है, जिससे सूखे का खतरा बढ़ जाएगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि कम बारिश का असर कृषि, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, ऊर्जा उत्पादन और जनस्वास्थ्य पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, यदि इस वर्ष अल नीनो की स्थिति बनती है, तो इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है।

वहीं, विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो बनने की आशंका 80 प्रतिशत है, जबकि इसके बाद यह 90 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार, नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान अल नीनो के एक मजबूत रूप लेने की संभावना भी लगभग 40 प्रतिशत है।

डब्ल्यूएमओ के महासचिव सेलेस्टे साउलो ने हाल ही में चेतावनी दी कि दुनिया को एक मजबूत अल नीनो के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके अनुसार, यह घटना सूखे और अत्यधिक वर्षा दोनों को बढ़ा सकती है तथा भूमि और महासागरों में हीटवेव (लू) के जोखिम को भी बढ़ाएगी।

उन्होंने कहा कि समय रहते जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियां लोगों की जान बचाने और अल नीनो के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अपेक्षा के अनुसार बढ़ता है, तो दक्षिण एशिया के कई देशों की तरह श्रीलंका को भी जल प्रबंधन और कृषि योजना पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

–आईएएनएस

केआर/


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