वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने सुनिश्चित की ईंधन आपूर्ति, अब हटेंगी अस्थायी पाबंदियां: जी. किशन रेड्डी


नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। भारत की स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन प्रणाली गगन (जीपीएस एडेड जीईओ ऑगमेंटेड नेविगेशन) अब वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद नेविगेशन प्रणाली के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। सरकार ने बुधवार को कहा कि यह प्रणाली देश के सैटेलाइट नेविगेशन इकोसिस्टम को और मजबूत करेगी तथा सुरक्षित हवाई यात्रा, बेहतर एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और देश भर में सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन सेवाओं के विस्तार में अहम भूमिका निभाएगी।

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, जून 2026 में गगन ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की, जब नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पहली बार किसी व्यावसायिक जेट विमान पर गगन की मदद से सैटेलाइट-आधारित लैंडिंग सिस्टम अप्रोच का सफल परीक्षण किया।

सरकार ने कहा कि एनएवीआईसी (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्सटेलेशन) के साथ मिलकर गगन भारत की स्वदेशी नेविगेशन तकनीकों को आगे बढ़ाने और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बयान में कहा गया है कि परिवहन, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण और अन्य कई क्षेत्रों में इसके बढ़ते उपयोग को देखते हुए गगन भविष्य में भी भारत के आत्मनिर्भर, तकनीक-आधारित और बेहतर कनेक्टेड भविष्य का एक प्रमुख आधार बना रहेगा।

गगन भारत की स्वदेशी सैटेलाइट बेस्ड ऑगमेंटेशन सिस्टम (एसबीएएस) है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।

यह प्रणाली जीपीएस की सटीकता बढ़ाने के साथ-साथ विमान संचालन के लिए आवश्यक इंटीग्रिटी (विश्वसनीयता) संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराती है, जिससे विमान संचालन अधिक सुरक्षित हो जाता है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित गगन केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य कई क्षेत्रों में भी सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन सेवाएं उपलब्ध कराने में सक्षम है। सरकार के अनुसार, यह भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक सैटेलाइट नेविगेशन क्षेत्र में नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

विमानन क्षेत्र में अत्यधिक सटीक नेविगेशन की आवश्यकता होती है, क्योंकि विमान की स्थिति में मामूली त्रुटि भी उड़ान सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।

हालांकि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) विमान की स्थिति निर्धारित करने में मदद करता है, लेकिन इसके सिग्नल वातावरणीय परिस्थितियों और अन्य तकनीकी कारणों से प्रभावित हो सकते हैं।

भारत के तेजी से उभरते विमानन बाजार को देखते हुए अधिक सटीक और विश्वसनीय नेविगेशन प्रणाली की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप गगन का विकास किया गया।

गगन एकीकृत ग्राउंड स्टेशनों, संचार नेटवर्क और जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स के माध्यम से कार्य करता है। यह जीपीएस सिग्नलों की लगातार निगरानी करता है, उनमें मौजूद त्रुटियों की गणना करता है और संशोधित (करेक्टेड) नेविगेशन जानकारी सीधे विमानों तक पहुंचाता है।

इससे जीपीएस सिग्नलों की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ जाती है, जिससे उड़ानों का संचालन अधिक सुरक्षित होता है, योजना निर्माण बेहतर होता है और विभिन्न सेवाओं की दक्षता भी बढ़ती है।

सरकार ने बताया कि गगन वर्ष 2015 से पूरी तरह परिचालन में है। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास अपना परिचालित सैटेलाइट-आधारित ऑग्मेंटेशन सिस्टम (एसबीएएस) उपलब्ध है। इस सूची में अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे देश पहले से शामिल हैं।

–आईएएनएस

डीबीपी


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