मुंबई, 6 अगस्त (आईएएनएस)। सुरों की दुनिया में अपनी मीठी और सधी हुई आवाज से पहचान बनाने वाले सुरेश वाडेकर का नाम भारतीय संगीत के बड़े गायकों में लिया जाता है। उन्होंने कई ऐसे गीत गाए जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। हालांकि संगीत के सफर के अलावा उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा भी सालों तक सुर्खियों में रहा। कहा जाता रहा कि एक समय बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के लिए सुरेश वाडेकर का रिश्ता आया था लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। हालांकि, बाद में सुरेश वाडेकर ने इस चर्चित किस्से पर अपनी बात रखते हुए अलग कहानी बताई।
सुरेश वाडेकर का जन्म 7 अगस्त 1955 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में हुआ था। उनके पिता ईश्वर वाडेकर मिल में काम करते थे, लेकिन उन्हें संगीत से बहुत लगाव था। घर में पिता को भजन गाते सुनकर सुरेश के अंदर भी संगीत के प्रति रुचि पैदा हुई। पिता चाहते थे कि उनका बेटा बड़ा गायक बने। इसी सपने को पूरा करने के लिए सुरेश ने बचपन से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया।
कहा जाता है कि छोटी उम्र में ही सुरेश वाडेकर ने संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी। उन्होंने गुरु पंडित जियालाल वसंत से शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखीं। गुरु के मार्गदर्शन ने उनकी आवाज को एक अलग पहचान दी।
साल 1976 में सुरेश वाडेकर ने ‘सुर-सिंगार’ संगीत प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस प्रतियोगिता में उनकी आवाज ने निर्णायकों का ध्यान खींचा। संगीतकार रविंद्र जैन और जयदेव जैसे दिग्गज उनकी प्रतिभा से प्रभावित हुए। इसके बाद रविंद्र जैन ने उन्हें राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘पहेली’ में गाने का मौका दिया। वहीं जयदेव ने फिल्म ‘गमन’ में उनसे मशहूर गजल ‘सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है’ गवाई। इस गाने ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में पहचान दिलाई।
इसके बाद सुरेश वाडेकर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 1981 में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने उन्हें फिल्म ‘क्रोधी’ में लता मंगेशकर के साथ गाने का मौका दिया। इसके बाद ‘प्यासा सावन’ का ‘मेघा रे मेघा रे’, ‘प्रेम रोग’ का ‘मैं हूं प्रेम रोगी’ और ‘मेरी किस्मत में तू नहीं शायद’, ‘सदमा’ का ‘ऐ जिंदगी गले लगा ले’ जैसे गीतों ने उन्हें घर-घर पहुंचा दिया।
‘प्रेम रोग’ के बाद उनकी आवाज ऋषि कपूर पर खूब पसंद की गई। इसके बाद उन्होंने कपूर परिवार की कई फिल्मों में अपनी आवाज दी। ‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘हिना’ और ‘प्रेम ग्रंथ’ जैसी फिल्मों में उनके गीत काफी लोकप्रिय हुए। उन्होंने गुलजार, आरडी बर्मन, एआर रहमान, विशाल भारद्वाज, इलैयाराजा और कई बड़े संगीतकारों के साथ काम किया।
सुरेश वाडेकर की निजी जिंदगी से जुड़ा माधुरी दीक्षित वाला किस्सा भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जब माधुरी दीक्षित का रिश्ता सुरेश वाडेकर के लिए आया था, तो परिवार ने उन्हें ‘दुबली’ बताकर नापसंद किया और बात आगे नहीं बढ़ी। लेकिन बाद में एक इंटरव्यू में सुरेश वाडेकर ने इस बात को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि यह किस्सा पूरी तरह सही नहीं है और उन्हें ऐसा कोई रिश्ता नहीं आया था। उन्होंने माधुरी दीक्षित के प्रति सम्मान जताते हुए उन्हें एक अच्छी दोस्त बताया।
सुरेश वाडेकर ने सिर्फ फिल्मों में ही नहीं बल्कि भक्ति संगीत और अलग-अलग भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने हिंदी और मराठी के अलावा भोजपुरी, कोंकणी और दूसरी भाषाओं में भी गाने गाए। बाद के वर्षों में उन्होंने संगीत शिक्षा के क्षेत्र में भी काम किया और आजीवासन म्यूजिक अकादमी के जरिए नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण दिया।
संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें साल 2011 में मराठी फिल्म ‘मी सिंधुताई सपकाल’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें लता मंगेशकर पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और साल 2020 में भारत सरकार की ओर से पद्मश्री सम्मान से भी नवाजा गया।
–आईएएनएस
पीके पीएम
