पटना, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी एक्शन में दिख रहे हैं। शपथ लेने के तुरंत बाद वे सचिवालय पहुंचे और कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर यह साफ संकेत दे दिया कि उनका कार्यकाल कार्य-उन्मुख और परिणाम-आधारित होगा।
बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के कुछ ही पल बाद सम्राट चौधरी सीधे सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय का कार्यभार संभाला। इससे इस बात के भी संकेत मिलते हैं कि वे काम को लेकर भी समय बर्बाद नहीं करना चाहते। इसके तुरंत बाद, उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की जिसमें विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव और शीर्ष अधिकारी शामिल थे।
बताया जाता है कि बैठक में उन्होंने अधिकारियों से विकास योजनाओं की गति बढ़ाने सहित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना और लंबित विकास परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा करने की बात कही। बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश जारी किए और यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान करना होगा।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपने लक्ष्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करें। सड़क, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे प्रमुख क्षेत्रों को ऐसे क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया गया, जिन पर तत्काल और निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देते हुए सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों को बुनियादी सेवाओं के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने शिकायतों के निवारण के लिए एक कुशल तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया और प्रशासन से आग्रह किया कि वे सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाने के लिए तकनीकी माध्यमों के प्रयोग पर भी जोर दें। इसके साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे नई योजनाओं से जुड़े प्रस्तावों को तेजी से आगे बढ़ाएं ताकि बिहार के विकास की गति को और अधिक तेज़ किया जा सके।
–आईएएनएस
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