अदिति अशोक: अंतरराष्ट्रीय गोल्फ में भारत की पहचान, टोक्यो ओलंपिक में दमदार रहा था प्रदर्शन


नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। ‘गोल्फ’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बेहद लोकप्रिय खेल है। भारत में यह खेल धीरे-धीरे अपनी जड़ें मजबूत बना रहा है। अदिति अशोक एक ऐसा नाम है जिन्होंने गोल्फ के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का नाम रोशन किया है।

अदिति अशोक का जन्म 29 मार्च, 1998 को बेंगलुरु में हुआ था। बहुत कम उम्र में ही गोल्फ में उनकी रुचि जगी और इसी खेल में उन्होंने अपना करियर बनाने का निश्चय किया। एक ऐसा खेल जो देश में लोकप्रिय न हो उसमें करियर बनाने का फैसला निश्चित तौर पर साहसिक था। अदिति के इस फैसले का उनके माता-पिता का समर्थन मिला।

12 साल की उम्र में, अदिति ने एशिया पैसिफिक इनविटेशन टूर्नामेंट में हिस्सा लिया था। 13 साल की उम्र में, अदिति ने अपना पहला प्रोफेशनल टूर जीता था। ​​उन्होंने 2012, 2013 और 2014 में लगातार तीन बार नेशनल जूनियर चैंपियनशिप जीती। 2014 में, उनके पास एक ही समय पर जूनियर और सीनियर दोनों खिताब थे। वह एकमात्र भारतीय गोल्फर थीं जिन्होंने 2013 के एशियन यूथ गेम्स और 2014 के यूथ ओलंपिक्स और एशियन गेम्स दोनों में हिस्सा लिया।

2015 में लेडीज ब्रिटिश एमेच्योर स्ट्रोक प्ले चैंपियनशिप जीतने के बाद, 1 जनवरी 2016 को वह प्रोफेशनल गोल्फर बन गईं।

वह लल्ला आयशा टूर स्कूल जीतने वाली सबसे कम उम्र की और पहली भारतीय बनीं। उन्होंने 2016 सीजन के लिए अपना लेडीज यूरोपियन टूर कार्ड हासिल कर लिया। इस जीत ने उन्हें किसी इंटरनेशनल टूर के लिए क्यू स्कूल जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी बना दिया।

अदिति ने 2016 का हीरो वीमेन्स इंडियन ओपन 3-अंडर-पार 213 के स्कोर के साथ जीता, और ऐसा करके वह लेडीज यूरोपियन टूर का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बन गईं। इसके बाद अदिति ने कतर लेडीज ओपन में जीत हासिल की। 2017 में, अदिति सिमी मेहरा के बाद भारत की दूसरी एलपीजीए खिलाड़ी बनीं, और ‘लुईस सुग्स रोलेक्स रूकी ऑफ द ईयर’ की रैंकिंग में आठवें स्थान पर रहीं।

2018 में, उन्होंने 24 टूर्नामेंट में से 17 में ‘कट’ हासिल किया, और दो बार टॉप-10 में जगह बनाई। 2019 में, अदिति ने 22 एलपीजीए टूर इवेंट्स में से 13 में कट बनाया।

टोक्यो ओलंपिक के दौरान अदिति को बड़ी पहचान मिली थी। वह पदक जीतने के बेहद करीब पहुंचकर चूक गईं थीं। अदिति चौथे स्थान पर रहीं। पदक न जीत पाने के बावजूद देश में उनके प्रदर्शन की भरपूर सराहना हुई। अदिति के टोक्यो में किए प्रदर्शन ने न सिर्फ उन्हें बल्कि गोल्फ को भी देश में बड़ी पहचान दी। अदिति ने रियो ओलंपिक 2016 में भी देश का प्रतिनिधित्व किया था और तब वह सबसे युवा गोल्फर थीं। रियो ओलंपिक में वह 41वें स्थान पर रहीं थीं।

क्रिकेट की लोकप्रियता वाले देश में गोल्फ और अदिति की चर्चा बेहद कम होती है, लेकिन यह प्रतिभाशाली खिलाड़ी नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करती रहती है।

–आईएएनएस

पीएके


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