धर्म और राजनीति का संबंध: अपनी-अपनी मर्यादा में मिलकर काम करने से  होगा सही विकास

धर्म और राजनीति का सहअस्तित्व लोकमंगलदाता है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर सैकड़ों वर्ष से राष्ट्रीय अभिलाषा है। अनेक प्रयास हुए। अनेक जीवन गए। व्यापक संघर्ष हुआ, लेकिन तत्कालीन राजनीति धर्म के साथ नहीं खड़ी हुई। अब राजनीति और धर्म के कर्तव्यपालन से करोड़ों लोगों का स्वप्न पूरा हुआ है। स्वतंत्र भारत में धर्म और राजनीति के बीच शत्रुता का भाव था। यहां धर्म और आधुनिक राजनीति के रिश्ते यूरोपीय माडल से संचालित होते रहे थे। यूरोप में राजव्यवस्था और चर्च के मध्य अधिकारों को लेकर लंबा संघर्ष चला। संघर्ष टालने के लिए चर्च और राजा के कार्यों में विभाजन हुआ।

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