नगर निगम का बोर्ड भंग होने से पहले ही कर्मचारियों की सूची में बदलाव कर दिया गया था। कर्मचारियों के वेतन के नाम पर हुए फर्जीवाड़े में अब जांचों का दौर शुरू हो गया है। स्वच्छता समिति के अध्यक्ष कोषाध्यक्ष पार्षद सुपरवाइजर और नगर निगम के अधिकारी भी जांच के दायरे में आ गए हैं। अब तक 85 वार्डों में नगर निगम की टीम भौतिक सत्यापन कर चुकी है।
