अयोध्या को भव्य रूप में विकसित करने की आवश्यकता इसलिए थी क्योंकि आगामी 22 जनवरी के बाद वहां विश्व भर से श्रद्धालुओं के जाने का सिलसिला कायम होने वाला है क्योंकि हिंदू समाज की पांच सौ वर्षों की कामना पूरी होने जा रही है। अयोध्या आस्था का केंद्र मात्र नहीं हजारों वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता का प्रतीक भी है। ऐसे स्थल का समुचित विकास होना ही चाहिए।
