नीतीश कैबिनेट में जबरदस्त मास्टरप्लान बनाया गया है। आरक्षण बिल को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए चर्चा की गई जिस पर सहमति बनने पर केंद्र को प्रस्ताव भेजा गया है। अगर केंद्र की तरफ से प्रस्ताव स्वीकृत हो जाता है तो आरक्षण बिल को कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकेगा ।
