नई दिल्ली, 5 अगस्त (केसरिया न्यूज़)। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर बढ़ता रुझान अब अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण चालक बनता जा रहा है। सरकार ने बुधवार को कहा कि देश में ईवी की बिक्री 2016 में लगभग 50,000 यूनिट से बढ़कर 2025 में 23 लाख यूनिट हो गई है, यानी करीब 46 गुना वृद्धि दर्ज की गई। अनुमान है कि 2034 तक भारत का ईवी बाजार 191.04 अरब डॉलर का हो जाएगा और इस दौरान इसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) 54.94 प्रतिशत रहेगी।
सरकारी बयान के अनुसार, भारत की वृद्धि वैश्विक रुझानों से भी तेज रही है। दुनिया भर में ईवी की बिक्री 2016 में 9.18 लाख यूनिट से बढ़कर 2024 में 1.878 करोड़ यूनिट हुई, यानी लगभग 20 गुना बढ़ी, जबकि भारत में यह वृद्धि कहीं अधिक तेज रही।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ईवी बैटरी बाजार भी तेजी से विस्तार करेगा। इसके 2025 में 2.71 अरब डॉलर से बढ़कर 2034 तक 15.90 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान इसकी सीएजीआर 21.70 प्रतिशत रहने की संभावना है।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक देश में बिकने वाले कुल वाहनों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक वाहनों की करना है। इसके लिए 2030 तक 13.2 लाख चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई गई है, ताकि ईवी इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके।
भारत में ईवी की पैठ 2020 में वैश्विक औसत के लगभग पांचवें हिस्से से बढ़कर 2024 में दो-पांचवें से अधिक हो गई है। वर्ष 2025 में इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान 12.8 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया और 8 लाख इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की बिक्री का रहा।
भारतीय ईवी अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। ईवी निर्यात 2020 में 12 लाख डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है। भारत से ईवी के प्रमुख निर्यात गंतव्यों में नेपाल, इंडोनेशिया और जापान शामिल हैं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी तेजी से प्रगति हो रही है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के अनुसार, जुलाई 2026 तक देश में मौजूद 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में से 16,561 स्टेशनों पर फास्ट ईवी चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है।
सरकारी बयान में कहा गया कि ईवी सेक्टर में निवेश भी लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र ने लगभग 1.4 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जो 2024 की तुलना में करीब 27 प्रतिशत अधिक है।
इस निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा ईवी निर्माताओं को मिला, जिन्होंने करीब 1.2 अरब डॉलर जुटाए। वहीं, दिल्ली ईवी निवेश के लिए देश का प्रमुख केंद्र बनकर उभरी।
सरकार ने कहा कि वह 2015 से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है। इनमें फेम योजना, एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) के लिए पीएलआई योजना और बैटरी लोकलाइजेशन जैसी पहलें शामिल हैं।
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