ओवैसी ने सतीश महाना के बयान पर जताई आपत्ति, बोले- विधानसभा की गरिमा से जुड़ा है सवाल

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नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के एक बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि स्पीकर की कुर्सी से दिया गया बयान सिर्फ एक टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह विधानसभा की गरिमा से जुड़ा सवाल है।

ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा के स्पीकर की कुर्सी पर बैठे सतीश महाना यह कहें कि, ‘जिन लोगों ने राम मंदिर का विरोध किया, अगर उन्होंने दान दिया है, तो वे रसीद दिखाएं, फिर हम देखेंगे कि उनका पैसा चोरी हुआ या नहीं,’ तो यह मामला सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि खुद विधानसभा की गरिमा का है।”

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब विधानसभा का कोई चुना हुआ सदस्य अपनी आस्था के आधार पर चोरी को चोरी नहीं कह सकता। ओवैसी ने आगे पूछा, “क्या अब लोगों को हत्या को हत्या या डकैती को डकैती कहने से पहले अपने धर्म का हलफनामा देना होगा?”

एआईएमआईएम नेता ने इसी तर्क को दूसरे मुद्दों से जोड़ते हुए कहा कि अगर यही सिद्धांत लागू होता है तो वक्फ बोर्डों पर भी इसे लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “तो फिर यही सिद्धांत वक्फ बोर्डों पर क्यों लागू नहीं होता, जहां गैर-मुसलमानों को जबरदस्ती शामिल किया जाता है?”

ओवैसी ने हिंदू एंडोमेंट बोर्ड और वक्फ बोर्ड की तुलना करते हुए कहा कि हिंदू एंडोमेंट बोर्डों को वह संवैधानिक सुरक्षा क्यों नहीं मिलती जो वक्फ को मिलती है। उन्होंने तीन तलाक कानून का भी जिक्र किया। ओवैसी के मुताबिक, “और जिस पार्टी का लोकसभा में एक भी मुस्लिम सांसद नहीं है, उसे तीन तलाक जैसे असंवैधानिक कानून बनाने का अधिकार कैसे मिल जाता है, जो सिर्फ मुसलमानों से जुड़ा है?”

अंत में ओवैसी ने कहा कि अगर कानून और सिद्धांत एक हैं तो उन्हें सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर सिद्धांत एक है, तो वह सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए।”

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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