काबुल, 4 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान मेडिकल एंड डेंटल काउंसिल (पीएमडीसी) ने रजिस्ट्रेशन, लाइसेंसिंग या प्रोफेशनल प्रैक्टिस के लिए अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा संस्थानों से मिली मेडिकल और डेंटल डिग्री लेना बंद कर दिया है। स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को बताया कि इससे उन पाकिस्तानी स्टूडेंट्स के लिए कन्फ्यूजन पैदा हो गया है जो अभी अफगानिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं।
एक बयान में, पीडीएमसी ने कहा कि जिन पाकिस्तानी नागरिकों ने पाकिस्तान के अप्रूव्ड एक्रेडिटेशन सिस्टम के तहत मान्यता प्राप्त दूसरे देशों के इंस्टीट्यूशन से मेडिकल या डेंटल डिग्री ली है, वे ही प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी असेसमेंट से गुजर पाएंगे।
अफगानिस्तान की न्यूज एजेंसी खामा प्रेस ने बताया कि काउंसिल ने कहा कि अफगानिस्तान के मेडिकल और डेंटल इंस्टीट्यूशन पाकिस्तान की मान्यता प्राप्त विदेशी यूनिवर्सिटी में नामित नहीं हैं।
खामा प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पीडीएमसी के इस फैसले से उन पाकिस्तानी स्टूडेंट्स में चिंता बढ़ गई है जो अफगान यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि वहां फीस कम है और दूसरे विदेशी डेस्टिनेशन के मुकाबले एडमिशन के मौके आसान हैं।
पाकिस्तान के मेडिकल रेगुलेटर का यह फैसला इस्लामाबाद और काबुल में तनाव और खराब संबंधों के बीच आया है, जहां बार-बार फायरिंग हो रही है और आम लोगों के मारे जाने की चिंता बढ़ रही है।
दरअसल, पाकिस्तान ने बार-बार तालिबान पर हथियारबंद समूहों, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को अफगानी धरती से काम करने से रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है। हालांकि तालिबान अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
28 जुलाई को, अफगानिस्तान में यूनाइटेड नेशंस असिस्टेंस मिशन (यूएनएएमए) ने कहा कि 1 अप्रैल से 30 जून के बीच अफगानिस्तान में सीमा पार हथियारबंद हिंसा में 57 लोग मारे गए और 342 दूसरे घायल हुए।
यूएनएएमए ने एक रिपोर्ट में कहा कि आम लोगों को हुए नुकसान की मुख्य वजह एयरस्ट्राइक और जमीनी लड़ाई थी। इस दौरान अफगानिस्तान में बॉर्डर पार से हुई सभी आम लोगों की मौत के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया गया।
अप्रैल-जून में अफगानिस्तान में आम लोगों की मौत पर यूएनएएमए के अपडेट के मुताबिक, मरने वालों में 112 बच्चे (26 मारे गए और 86 घायल) और 40 औरतें (छह मारे गए और 34 घायल) शामिल हैं।
यूएन एजेंसी ने बयान में कहा, “पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा 28 जून को पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में सबसे ज्यादा आम नागरिक मारे गए, इसके बाद 27 से 29 अप्रैल के बीच कुनार प्रांत में गोलाबारी हुई।”
–आईएएनएस
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