संतकबीरनगर, 22 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर के बहुचर्चित सात वर्षीय मासूम अरुण उर्फ डग्गू हत्याकांड में चार साल बाद बड़ा फैसला आया है। अदालत ने दोनों आरोपियों रविचंद्र उर्फ मंटू और धनेश्वर उर्फ झिंगेलाल को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने विवेचना में गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्कालीन विवेचक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की है।
कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के मटिहना गांव निवासी सात वर्षीय अरुण उर्फ डग्गू वर्ष 2022 में लापता हो गया था। अगले दिन महुली थाना क्षेत्र के राजघाट के पास नाले किनारे झाड़ियों से उसका शव बरामद हुआ था। पुलिस ने हत्या के आरोप में रविचंद्र उर्फ मंटू और धनेश्वर उर्फ झिंगेलाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
करीब चार साल तक चली सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत और पूरी श्रृंखला साबित नहीं कर सका। ‘लास्ट सीन’, मकसद, बरामदगी और वैज्ञानिक साक्ष्य भी संदेह से परे अपराध सिद्ध करने में असफल रहे। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर रिहा करने का आदेश दिया गया।
फैसले में अदालत ने विवेचना पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्कालीन विवेचक निरीक्षक विजय नारायण प्रसाद ने जांच में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, जिससे जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई। अदालत ने इसे घोर लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। अब इस फैसले के बाद पूरे मामले में पुलिस जांच की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
5 मार्च 2022 को मटिहना गांव निवासी महिला ने थाना कोतवाली खलीलाबाद को ने सूचना दी कि उसका 7 वर्षीय बेटा लापता हो गया है। इसके बाद 6 मार्च को बच्चे का शव मिला था। शव मिलने पर महिला ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि गांव के रविचंद्र उर्फ मंटू और धनेश्वर उर्फ झिंगेलाल ने उसके बेटे को अगवा कर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। धनेश्वर को कुछ समय बाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन रविचंद्र जेल में ही बंद थे।
–आईएएनएस
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