इल्तिजा मुफ्ती ने फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड को लेकर प्रदर्शन को प्रतीकात्मक कहा


श्रीनगर, 20 जुलाई (आईएएनएस)। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन आयोजित किया गया है। जिसको लेकर महबूबा मुफ्ती की बेटी और पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती की प्रतिक्रिया सामने आई है।

इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “दिल्ली के किसी आम क्लब में बिना किसी जोश के, जानबूझकर हल्के-फुल्के ढंग से और बिना आर्टिकल 370 का जिक्र किए आयोजित एक-दिवसीय कार्यक्रम के बजाय, जरा जंतर-मंतर पर उस विरोध-प्रदर्शन की कल्पना कीजिए जहां जम्मू-कश्मीर का स्पेशल स्टेटस बहाल करने के नारे गूंज रहे हों।

इल्तिजा मुफ्ती ने लिखा, “यह दुखद है कि एक चुनी हुई सरकार एक गैर-कानूनी और अधिकार छीनने वाले कदम को सामान्य बनाने का रास्ता चुन रही है।”

इससे पहले 18 जुलाई को इल्तिजा मुफ्ती ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा था, “पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के जंतर-मंतर वाले विरोध प्रदर्शन में तभी शामिल होगी जब जम्मू-कश्मीर का स्पेशल स्टेटस बहाल करना ही मुख्य मांग हो। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह 5 अगस्त 2019 के उन काले, असंवैधानिक और अधिकार छीनने वाले फैसलों पर पर्दा डालने और उन्हें सही ठहराने जैसा होगा।”

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18 जुलाई को नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से जंतर-मंतर पर प्रस्तावित राज्य का दर्जा बहाली संबंधी विरोध प्रदर्शन के मौजूदा स्वरूप से दूरी बना ली थी। उनका कहना था कि यदि प्रदर्शन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को प्रमुखता दी जाए, तभी पीडीपी उसमें शामिल होगी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में महबूबा मुफ्ती ने लिखा था, “गहन विचार-विमर्श के बाद पीडीपी ने जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया है, लेकिन शर्त यह है कि अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का मुख्य हिस्सा हो।”

उन्होंने कहा था, “सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अनुच्छेद 370 की बहाली के हमारे व्यापक संवैधानिक संघर्ष के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा होगा। इससे भाजपा के 5 अगस्त, 2019 के गैर-कानूनी कदमों को वैधता मिलने का संदेश जाएगा। हमारी लड़ाई संवैधानिक अधिकारों के लिए है, न कि प्रतीकात्मक कदमों के लिए।”

–आईएएनएस

एसडी/पीएम


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