मुंबई, 18 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई समय से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस शनिवार सुबह सफदरजंग अस्पताल ले गई। इसके बाद से सोशल मीडिया समेत मनोरंजन जगत के कई सेलेब्स ने पुलिस एक्शन पर गुस्सा जाहिर किया।
म्यूजिक कंपोजर विशाल डडलानी, जाने-माने एक्टर प्रकाश राज, अभिनेत्री कुनिका सहानंद समेत कई सेलेब्स ने गुस्सा जाहिर किया।
म्यूजिक कंपोजर विशाल डडलानी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की। वीडियो शेयर करते हुए वे कहते हैं, “क्या आपने कभी ऐसी कायरता देखी है? सोनम वांगचुक को जबरदस्ती ले गए। देशवासियों आप कब जागेंगे? अगर अभी नहीं जागेंगे, तो कब जागेंगे? काश मैं किसी तरह मदद करने के लिए वहां होता।”
वरिष्ठ अभिनेता प्रकाश राज ने भी केंद्र सरकार की कार्रवाई और प्रदर्शन पर कथित सख्ती की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक नोट शेयर करते हुए लिखा, “दुनिया एक कायर सरकार देख रही है, जो युवाओं से बातचीत नहीं करना चाहती, बल्कि तानाशाहों की तरह बर्ताव करना चाहती है। सोनमा वांगचुक को जबरदस्ती ले जाना और स्टूडेंट्स के शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट में रुकावट डालना डर की निशानी है।”
अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने भी इंस्टाग्राम के माध्यम से इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने वीडियो जारी करते हुए लिखा, “आज जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ, वह हर उस नागरिक के लिए चिंता का विषय होना चाहिए, जो लोकतंत्र में विश्वास रखता है। लोकतंत्र सिर्फ चुनाव कराने का नाम नहीं है। यह अपनी बात रखने, सवाल पूछने, शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने और अपनी आवाज सुने जाने के अधिकार का भी नाम है। जब शांतिपूर्ण विरोध का जवाब बातचीत के बजाय बल प्रयोग से दिया जाता है, तो हमें खुद से पूछना चाहिए कि क्या हम सच में लोगों की बात सुन रहे हैं?
उन्होंने आगे लिखा, “आप किसी प्रदर्शन से सहमत हो सकते हैं या असहमत, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। आज उनकी आवाज दबाई जा रही है, कल हमारी भी हो सकती है। लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है, जब लोगों को अपनी बात कहने की आजादी मिले, न कि उन्हें चुप करा दिया जाए।”
अभिनेता राज बब्बर के बेटे और अभिनेता आर्य बब्बर ने भी इंस्टाग्राम के जरिए इस पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए कहा, “सोनम वांगचुक को तकनीकी आधार पर हिरासत में लिया गया है। यह किसी स्टैंडअप कॉमेडी जैसा लगता है, हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं।”
उन्होंने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “जो लोग यह कह रहे हैं कि उन्हें अगवा नहीं किया गया, बल्कि अस्पताल ले जाया गया, उनसे मेरी अपील है कि पहले यह समझें कि दिल्ली पुलिस उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ क्यों लेकर गई। मेरी नजर में इसे जबरन ले जाना कहा जा सकता है, क्योंकि उन्हें उनका भूख हड़ताल खत्म कराने के लिए उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां से हटाया गया। बड़ा सवाल यह नहीं है कि उन्हें कहां ले जाया गया, बल्कि यह है कि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन को उनकी इच्छा के खिलाफ खत्म करने का अधिकार किसने दिया?”
उन्होंने आगे लिखा, “संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और संगठन बनाने का अधिकार देता है, हालांकि ये अधिकार कानून के तहत तय उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। क्या सोनम वांगचुक ने खुद अस्पताल ले जाने की इच्छा जताई थी? अगर नहीं, तो यह सवाल उठता है कि यह फैसला किसने लिया और क्यों? तथ्यों को पढ़िए, सवाल पूछिए, सोचिए और फिर अपनी राय बनाइए।”
–आईएएनएस
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