पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल महंगा: अब रोजाना तय होंगी ईंधन की कीमतें, डीलर्स ने किया विरोध

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इस्लामाबाद, 18 जुलाई (आईएएनएस)। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। सरकारी फरमान जारी किया गया है जिसके मुताबिक अब ईंधन की कीमतें रोजाना तय की जाएंगी। इस ऐलान का जमीन पर विरोध भी दिखने लगा है।

सरकार ने पेट्रोल 5.44 पीकेआर (पाकिस्तानी रुपये) प्रति लीटर और डीजल 31.05 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर महंगा किया है। नई दरें शनिवार से लागू हो गईं और ये 20 जुलाई तक प्रभावी रहेंगी। बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 316.15 रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 354.35 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक डॉन ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव और ईरान-अमेरिका तनाव के कारण अब देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोजाना तय की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि वजीर-ए-आजम और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (ओजीआरए) को अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर प्रतिदिन ईंधन की कीमतें तय करने की जिम्मेदारी सौंपी है। ओजीआरए अब अपनी वेबसाइट पर कीमतों के साथ-साथ उनके निर्धारण के आधार भी सार्वजनिक करेगा।

मार्च की शुरुआत से पाकिस्तान सरकार हर सप्ताह ईंधन की कीमतों की समीक्षा कर रही थी। साथ ही, मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते संभावित तेल आपूर्ति संकट को देखते हुए ईंधन बचत के उपाय और अप्रैल में लक्षित ईंधन सब्सिडी भी लागू की गई थी।

सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीजल पर लगभग 105 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर विभिन्न करों और शुल्कों के रूप में वसूल रही है। इसमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और इनलैंड फ्रेट इक्वलाइजेशन मार्जिन (आईएफईएम) शामिल हैं।

ऑल पाकिस्तान डीलर्स एसोसिएशन ने ईंधन की कीमतें रोजाना तय करने के फैसले का विरोध किया है। संगठन ने कहा कि वह अगले सप्ताह इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन की रणनीति तैयार करेगा।

पेट्रोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से निजी वाहन, मोटरसाइकिल, ऑटो-रिक्शा और छोटे वाहनों में होता है, इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का सीधा असर मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग पर पड़ता है। वहीं, डीजल का उपयोग भारी परिवहन, बिजली संयंत्रों और बड़े जनरेटरों में होने के कारण इसकी कीमत बढ़ने से माल ढुलाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

–आईएएनएस

केआर/

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