गुवाहाटी, 15 जुलाई (आईएएनएस)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने बुधवार को डिब्रूगढ़ जिले के चबुआ में श्री श्री अनिरुद्धदेव स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के स्थायी कैंपस की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया ताकि यह जल्द से जल्द पूरा हो सके।
निर्माण स्थल के अपने दौरे के दौरान राज्यपाल ने कार्यों का निरीक्षण किया और सार्वजनिक कार्य विभाग (बिल्डिंग) के अधिकारियों से काम में तेजी लाने को कहा ताकि विद्यार्थी जल्द से जल्द नई सुविधाओं का इस्तेमाल शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि स्थायी कैंपस के पूरा होने से विश्वविद्यालय अपने अकादमिक संरचना को बढ़ा सकेगी और ज्यादा इनोवेटिव कोर्स शुरू कर सकेगी, जिससे यह देश का सबसे अच्छा खेल विश्वविद्यालय बन सकेगा।
राज्यपाल ने कैंपस में प्रस्तावित सुविधाओं की समीक्षा की और समर्पित योग केंद्र बनाने के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी। खेल और स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि ऐसी सुविधाएं विद्यार्थियों के संपूर्ण विकास में मददगार होंगी। उन्होंने विश्वविद्यालय के अधिकारियों को लोक निर्माण विभाग और डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन के साथ करीबी तालमेल बनाए रखने का निर्देश दिया, ताकि प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा होना सुनिश्चित किया जा सके। राज्यपाल ने संबंधित विभाग को निर्माण पर हर महीने प्रगति रिपोर्ट राजभवन को नियमित समीक्षा के लिए जमा करने का भी निर्देश दिया।
इससे पहले, आचार्य ने विश्वविद्यालय के सिटी कैंपस में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जहां कुलपति प्रो. हीरेंद्र नाथ सरमा ने उन्हें एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के जरिए संस्थान की अकादमिक उन्नति और संरचना विकास के बारे में जानकारी दी।
विश्वविद्यालय के अकादमिक रोडमैप की समीक्षा करते हुए, गवर्नर ने इस बात पर जोर दिया कि इसके कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों के मुताबिक होने चाहिए। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करके क्लासरूम लर्निंग और प्रैक्टिकल अनुभव के बीच के गैप को कम करने के लिए ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के कॉन्सेप्ट को शामिल करने के महत्व पर भी जोर दिया।
बैठक के दौरान, कुलपति ने राज्यपाल को बताया कि विश्वविद्यालय ने कई नए कोर्स शुरू किए हैं, जिनमें हाथी को काबू में करने, ट्रेनिंग देने और देसी खेलों पर कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों का मकसद पारंपरिक ज्ञान पद्धति को बचाना है, साथ ही आधुनिक खेल शिक्षा के साथ-साथ इलाके की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है।
–आईएएनएस
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