अमरावती, 15 जुलाई (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश सरकार ने बुधवार को कहा कि रामायपट्टनम बंदरगाह के संचालन और रखरखाव के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत पूरी तरह पारदर्शी बोली प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार ने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना और बंदरगाह का तेज़ी से विकास सुनिश्चित करना है।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी द्वारा गठबंधन सरकार के इस फैसले की आलोचना किए जाने के बाद राज्य सरकार ने एक बयान जारी कर अपने निर्णय का बचाव किया।
सरकार ने कहा कि बोली प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है, जिसमें सरकार के लिए राजस्व साझेदारी, न्यूनतम गारंटीड राजस्व (एमजीआर), इक्विटी हिस्सेदारी, अग्रिम भुगतान और बंदरगाह की क्षमता बढ़ाने जैसी स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं।
आंध्र प्रदेश समुद्री बोर्ड (एपीएमबी) के माध्यम से सरकार प्रकाशम जिले में रामायपट्टनम बंदरगाह को डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत एक प्रमुख ऑल-वेदर मल्टी-कार्गो बंदरगाह के रूप में विकसित कर रही है।
सरकार ने कहा कि बंदरगाहों के संचालन और रखरखाव में पीपीपी मॉडल कोई नई व्यवस्था नहीं है। पिछले 25-30 वर्षों से देश के प्रमुख और गैर-प्रमुख बंदरगाहों में इसी मॉडल का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। केंद्र सरकार भी बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के तहत संचालित कई बंदरगाहों में यही मॉडल अपना रही है।
सरकार के अनुसार, भारत में 119 गैर-प्रमुख बंदरगाह या तो संचालित हो रहे हैं या विकासाधीन हैं। इनमें से 108 बंदरगाह (करीब 91 प्रतिशत) पीपीपी मॉडल के तहत विकसित और संचालित किए जा रहे हैं।
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और पुडुचेरी जैसे राज्यों में सभी परिचालित गैर-प्रमुख बंदरगाह पीपीपी मॉडल पर संचालित हो रहे हैं, जबकि गुजरात के लगभग 90 प्रतिशत गैर-प्रमुख बंदरगाह भी इसी व्यवस्था के तहत काम कर रहे हैं।
सरकार ने बताया कि मौजूदा गठबंधन सरकार ने रामायपट्टनम, मछलीपट्टनम और मुलापेटा बंदरगाह परियोजनाओं के निर्माण कार्य में तेजी लाई है। रामायपट्टनम में 80.50 प्रतिशत, मछलीपट्टनम में 58.91 प्रतिशत और मुलापेटा में 76.02 प्रतिशत भौतिक प्रगति हासिल की जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक तीनों बंदरगाहों का निर्माण पूरा करना है।
चार चरणों (ए, बी, सी और डी) में विकसित होने वाला रामायपट्टनम बंदरगाह 2,538.42 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा। पूरी परियोजना में कुल 19 बर्थ होंगे, जिनमें एक बीपीसीएल के लिए समर्पित लिक्विड बर्थ भी शामिल है।
पहले चरण (फेज-ए) की वार्षिक कार्गो क्षमता 3.404 करोड़ टन होगी, जबकि पूरी परियोजना के पूरा होने पर क्षमता बढ़कर 13.854 करोड़ टन प्रतिवर्ष हो जाएगी।
सरकार ने बताया कि फेज-ए की स्वीकृत लागत 4,929.39 करोड़ रुपये है। इस चरण का 80.50 प्रतिशत निर्माण कार्य और 73.95 प्रतिशत वित्तीय प्रगति पूरी हो चुकी है। शेष चरणों का विकास चयनित पीपीपी ऑपरेटर द्वारा किया जाएगा।
परियोजना के लिए रियायत (कन्सेशन) अवधि 30 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसे आवश्यकतानुसार 20 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।
सरकार के अनुसार, यह बंदरगाह बल्क, कंटेनर, तरल और गैस कार्गो के संचालन में सक्षम होगा। परियोजना की प्रमुख शर्तों के तहत पीपीपी ऑपरेटर को पहले चरण में कम से कम एक पूर्णतः मशीनीकृत कंटेनर बर्थ विकसित करना होगा, जिसमें किसी वैश्विक कंटेनर ऑपरेटर की भागीदारी या अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के साथ बाध्यकारी समझौता होना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, चयनित ऑपरेटर को 1,500 करोड़ रुपये का अग्रिम प्रीमियम दो चरणों में जमा करना होगा। साथ ही, सरकार को राजस्व में हिस्सेदारी देनी होगी, जो समय के साथ बढ़ती जाएगी। यदि राजस्व हिस्सेदारी न्यूनतम गारंटीड राजस्व से कम रहती है तो निर्धारित एमजीआर का भुगतान करना अनिवार्य होगा।
–आईएएनएस
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