नई दिल्ली, 15 जुलाई (आईएएनएस)। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आगाज 23 जुलाई से होने जा रहा है। इस इवेंट की मेजबानी स्कॉटलैंड का ग्लासगो शहर करेगा। भारत के 124 खिलाड़ी इस बार मेडल पाने के लिए जद्दोजहद करते हुए नजर आएंगे। आइए आपको कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे यादगाल पलों के बारे में बताते हैं।
मिल्खा सिंह का पहला गोल्ड मेडल: साल 1934 में भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना पहला मेडल जीता था। यह मेडल कुश्ती में राशिद अनवर ने सिल्वर के रूप में दिलाया था। हालांकि, भारत को अपने पहले गोल्ड मेडल के लिए काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। देश को इस टूर्नामेंट में पहला गोल्ड कार्डिक में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 1958 में महान धावक मिल्खा सिंह ने दिलाया। मिल्खा ने 440 यार्ड स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पहला स्थान हासिल किया था।
मेजबानी में ऐतिहासिक प्रदर्शन: भारत ने साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की और इस साल देश का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। भारत की झोली में 38 गोल्ड, 27 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज मेडल आए। यानी भारत ने कुल मिलाकर 101 मेडल जीते। इस प्रदर्शन को भारत दोबारा कभी दोहरा नहीं सका है।
हॉकी में ऐतिहासिक गोल्ड: साल 2002 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला हॉकी टीम ने वो कर दिखाया था, जो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करते हुए पहला गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। 17वें नंबर की रैंकिंग वाली भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड, कनाडा, साउथ अफ्रीका जैसी टीमों के खिलाफ दमदार प्रदर्शन किया था। फाइनल मुकाबले में भारत ने विश्व रैंकिंग में पांचवें नंबर की टीम इंग्लैंड को हराकर हर किसी को अपने खेल का मुरीद बना दिया था। भारतीय महिला हॉकी की इससे इन खेलों में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
मनिका बत्रा का गोल्ड: साल 2018 में गोल्ड कोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने अपने प्रदर्शन से हर किसी को चौंका दिया था। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल को अपने नाम किया था। वह टेबल टेनिस में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं।
सात्विक-चिराग की जोड़ी का यादगार प्रदर्शन: साल 2022 में बर्मिंघम में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने इतिहास रचा था। पूरे टूर्नामेंट में अपने दमदार खेल के बूते वह गोल्ड मेडल जीतने में सफल रहे थे। यह पहला मौका था, जब कॉमनवेल्थ गेम्स के पुरुष युगल में भारत की झोली में गोल्ड मेडल आया था। सात्विक-चिराग ने इंग्लैंड के बेन लेन और सीन वेंडी की जोड़ी को हराकर इतिहास रचा था।
गीता फोगाट का गोल्ड: साल 2010 में हुए कॉमनेल्थ गेम्स में गीता फोगाट ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 55 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। गीता कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी थीं। उनके इस ऐतिहासिक प्रदर्शन ने महिलाओं को इस खेल में आने के लिए प्रेरित करने का काम किया था।
सैयद मोदी और मोहम्मद अली का ऐतिहासिक प्रदर्शन:मोहम्मद अली कमर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को मुक्केबाजी में मेडल दिलाने वाले पहले मुक्केबाज थे। उन्होंने तीन राउंड में पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। वहीं, सैयद मोदी ने 1982 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को बैडमिंटन की एकल स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था।
–आईएएनएस
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