ओडिशा में केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा, 'ज्ञानोदय' योजना की गाइडलाइंस जारी


भुवनेश्वर, 14 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा के उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने मंगलवार को ‘ज्ञानोदय योजना को लागू करने के लिए गाइडलाइंस जारी की। यह एक प्रमुख पहल है जिसके तहत किंडरगार्टन (केजी) से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएट (पीजी) स्तर तक मुफ्त शिक्षा दी जाएगी।

आईएएनएस से बात करते हुए मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की घोषणा की थी और अब उच्च शिक्षा विभाग ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले अंडरग्रेजुएट (यूजी) और पोस्टग्रेजुएट (पीजी) प्रोग्राम के लिए जरूरी आदेश जारी कर दिए हैं। सेल्फ-फाइनेंसिंग और पीपीपी-मोड वाले कोर्स को छोड़कर सभी योग्य प्रोग्राम इस योजना के दायरे में आते हैं।

इस योजना के बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए मंत्री सूर्यवंशी ने कहा कि राज्य में कई छात्र आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा नहीं ले पाते हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग का कार्यभार संभालने के बाद राज्य सरकार राज्य में पढ़ाई छोड़ने वालों (ड्रॉपआउट) की बढ़ती दर, ओडिशा के ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो का राष्ट्रीय औसत से कम होना और छात्रों को पढ़ाई में बनाए रखने में असमर्थता को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित थी।

मंत्री ने कहा कि एक नतीजा यह निकला कि उच्च शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। केजी से पीजी तक शिक्षा को मुफ्त बनाने की इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बुनियादी उच्च शिक्षा से वंचित न रहे।

इस पहल के दिशा-निर्देशों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि ये निर्देश राज्यभर में उच्च शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी शिक्षण संस्थानों के साथ साझा किए जाएंगे। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार इस पहल का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य छात्र आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे और साथ ही उच्च शिक्षा तक सभी की समान और समावेशी पहुंच को बढ़ावा दिया जा सके।

मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत राज्य के पब्लिक विश्वविद्यालयों, सरकारी कॉलेजों और 488 और 662 ग्रांट-इन-एड कैटेगरी वाले गैर-सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में रेगुलर अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिला लेने वाले छात्रों को कोई फीस नहीं देनी होगी।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लागू की गई इस योजना का मकसद नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के अनुरूप शिक्षा में आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर करना, छात्रों को पढ़ाई में बनाए रखना और ड्रॉपआउट दर को कम करना है।

मंत्री ने यह भरोसा भी जताया कि ‘ज्ञानोदय – शिक्षारु समृद्धि’ पहल से ओडिशा के ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो को 60 प्रतिशत तक बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी, जैसा कि ओडिशा विजन 2036 और विजन 2047 के तहत परिकल्पना की गई है।

हालांकि, यह योजना सेल्फ-फाइनेंसिंग कोर्स, बिना सहायता वाले प्राइवेट संस्थानों, डिस्टेंस और ओपन लर्निंग प्रोग्राम, या एमबीए, एमसीए, बीबीए, बीसीए, बीएड, एलएलबी, एलएलएम और इसी तरह के अन्य प्रोफेशनल कोर्स पर लागू नहीं होगी।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए छात्रों को स्टूडेंट एकेडमिक मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल के माध्यम से दाखिला लेना होगा और कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखनी होगी। खास मामलों में उपस्थिति की जरूरत को घटाकर 65 प्रतिशत किया जा सकता है। यह फायदा किसी छात्र को अंडरग्रेजुएट या पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में पहली बार एडमिशन लेने पर ही मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस स्कीम के तहत राज्य सरकार एडमिशन और री-एडमिशन फीस, डेवलपमेंट फीस और एडमिशन के समय लिए जाने वाले दूसरे चार्ज का खर्च उठाएगी।

हालांकि परीक्षाओं की गंभीरता बनाए रखने के लिए छात्रों को परीक्षा फीस का भुगतान करना जारी रखना होगा।

सरकार ने फीस रेगुलेशन सिस्टम भी लागू किया है, जिसके तहत संस्थान स्टेट फीस रेगुलेशन कमिटी की मंजूरी के बिना एडमिशन से जुड़ी फीस में बदलाव नहीं कर सकते। फीस वापसी के लिए सिर्फ उसी फीस स्ट्रक्चर पर विचार किया जाएगा जिसे एडमिशन प्रोसेस से पहले पोर्टल पर अपलोड किया गया था।

मंत्री ने कहा कि ओडिशा ‘ज्ञानोदय-शिक्षा रु समृद्धि’ स्कीम के तहत केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा लागू करने वाला पहला राज्य है।

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी


Related Articles

Latest News