बांग्लादेश: बार काउंसिल चुनाव में कुछ वकीलों को नहीं लेने दिया जा रहा भाग, 16 मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता


पेरिस, 7 जुलाई (आईएएनएस)। दुनिया भर के 16 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, बार एसोसिएशनों और लॉ सोसाइटीज ने मंगलवार को बांग्लादेश में वकीलों को बार एसोसिएशन चुनावों में भाग लेने से रोकने, डराने-धमकाने और कथित तौर पर “राजनीति-प्रेरित बहिष्कार” की कड़ी निंदा की।

इन संगठनों का आरोप है कि आवामी लीग समर्थक या स्वतंत्र उम्मीदवारों के रूप में पहचाने जाने वाले वकीलों को बांग्लादेश की विभिन्न बार एसोसिएशनों के चुनावों में हिस्सा लेने से रोका जा रहा है। संगठनों ने दावा किया कि ये घटनाएं तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के गठन के बाद से जारी हैं।

एक संयुक्त बयान में संगठनों ने बांग्लादेश सरकार के उस फैसले पर गंभीर चिंता जताई, जिसमें 30 जून को बांग्लादेश बार काउंसिल के संचालन के लिए 15 सदस्यीय अस्थायी समिति (एड हॉक कमेटी) गठित की गई। आरोप है कि इस समिति में केवल बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी समर्थित वकीलों को शामिल किया गया है। यह समिति 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक कानूनी पेशे को नियंत्रित करने वाली संस्था का संचालन करेगी।

बयान में कहा गया, “यह फैसला पेशेवर संस्थाओं के लोकतांत्रिक सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है और कानूनी पेशे की स्वतंत्रता तथा प्रतिनिधित्व की भावना को कमजोर करता है।”

संगठनों ने कहा कि यह केवल “प्रशासनिक अनियमितता या राजनीतिक विवाद” का मामला नहीं है, बल्कि यह कानूनी पेशे की स्वतंत्रता, कानून के शासन, संगठन बनाने की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के संवैधानिक मूल्यों पर व्यवस्थित हमला है।

पेरिस स्थित मानवाधिकार संगठन ‘जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस’ (जेएमबीएफ) की रिपोर्ट और मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए संगठनों ने कहा कि बांग्लादेश की करीब 23 बार एसोसिएशनों में 300 से अधिक वकीलों को चुनाव लड़ने से रोका गया है।

इनमें बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अलावा ढाका, चटगांव, राजशाही, मैमनसिंह, खुलना, गाजीपुर, बारीसाल, कुमिल्ला, मानिकगंज, मुंशीगंज, दिनाजपुर, नाओगांव, झालोकाठी, पंचगढ़, चांदपुर, शरीयतपुर, जामालपुर, शेरपुर, तंगाइल, मेहरपुर, पाटुआखाली और ठाकुरगांव जैसे क्षेत्रों की बार एसोसिएशन शामिल हैं।

संगठनों ने बांग्लादेश सरकार, कानूनी समुदाय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे बार काउंसिल की अस्थायी समिति गठित करने के आदेश को तुरंत वापस लें और कथित रूप से “गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण, अनियमित और भेदभावपूर्ण चुनाव प्रक्रियाओं” से गठित समितियों को रद्द करें।

उन्होंने यह भी मांग की कि सभी “गैरकानूनी रूप से रद्द की गई उम्मीदवारी” बहाल की जाए और हर योग्य वकील को राजनीतिक विचारधारा, संबद्धता या पहचान से परे समान रूप से नामांकन और चुनाव में भाग लेने का अधिकार दिया जाए।

संगठनों ने कहा, “कानूनी पेशे की स्वतंत्रता लोकतंत्र, कानून के शासन और मानवाधिकारों की सुरक्षा की बुनियादी नींव है। वकीलों को चुप कराने, डराने, बाहर करने या राजनीतिक आधार पर भेदभाव करने के प्रयास न केवल व्यक्तिगत वकीलों के अधिकारों को प्रभावित करते हैं, बल्कि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाते हैं।”

–आईएएनएस

केआर/


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