मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में भूमि एवं संपत्ति प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए यूनिक प्रॉपर्टी आईडी व्यवस्था को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत किसी भी संपत्ति की पहचान, स्वामित्व और उससे जुड़े रिकॉर्ड की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी। फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। भूमि पंजीकरण के साथ स्वतः नामांतरण प्रक्रिया हो जाएगी। इसके लिए विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग ने अचल संपत्तियों के पंजीकरण, स्वामित्व सत्यापन और नामांतरण प्रक्रिया में व्यापक सुधारों का खाका प्रस्तुत किया। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी स्वामित्व, विवादित संपत्तियों की बिक्री और धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।
भू-आधार से जुड़ेगा हर भूमि पार्सल
प्रदेश में प्रत्येक भूमि पार्सल को यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (यूएलपीआईएन) यानी ”भू-आधार” प्रदान किया जाएगा। यह जियो-रेफरेंस्ड पहचान संख्या भूमि रिकॉर्ड को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और जीआईएस प्रणालियों से जोड़ेगी, जिससे रिकॉर्ड अधिक सटीक और अद्यतन रहेंगे।
एक मंच पर उपलब्ध होंगे सभी रिकॉर्ड
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति कर, बिजली, पानी, सीवर, राजस्व और स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग के रिकॉर्ड को एकीकृत किया जाएगा। कॉमन प्रॉपर्टी आईडी आधारित यह प्रणाली विभिन्न विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने और कर संग्रहण को अधिक प्रभावी बनाएगी।
