अमेरिका को जवाबदेह ठहराने में फेल रही सरकार : सुप्रिया श्रीनेत

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नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी शांति स्थापित होने की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए, क्योंकि युद्ध और संघर्षों की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को चुकानी पड़ती है।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान हुए हमलों में तीन भारतीय नागरिकों की जान चली गई। उन्होंने दावा किया कि आदित्य शर्मा, पटनायक और सुरेश चौरसिया सहित भारतीय नागरिकों की मौत अमेरिकी कार्रवाई के कारण हुई, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर न तो शोक व्यक्त किया और न ही पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार अमेरिका को जवाबदेह ठहराने में भी विफल रही। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब इस मुद्दे को अमेरिका के समक्ष उठाया गया, तब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से कोई खेद व्यक्त नहीं किया गया। इसके साथ ही भारत सरकार इस मामले में प्रभावी ढंग से अपनी बात रखने में असफल रही।

श्रीनेत ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते में भारत की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति होने के बावजूद इस पूरी प्रक्रिया में कहीं दिखाई नहीं दिया, जबकि पाकिस्तान जैसे देश की भूमिका की चर्चा हो रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल में भारत की भागीदारी क्यों नहीं रही?

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किसी महाशक्ति के प्रभाव में आए बिना स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिकी दबाव के बावजूद राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े प्रकरण का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारत ने कड़ा रुख अपनाया था, जिसके बाद अमेरिका को खेद व्यक्त करना पड़ा।

सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि पूर्व प्रधानमंत्रियों ने हमेशा देश की संप्रभुता और सम्मान को सर्वोपरि रखा, जबकि मौजूदा सरकार अमेरिका के प्रति जरूरत से ज्यादा नरम रुख अपना रही है। उन्होंने कहा कि देश की विदेश नीति में आत्मसम्मान और स्वतंत्रता सर्वोच्च होनी चाहिए।

–आईएएनएस

एसएके/एबीएम

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