एवियन, 15 जून (आईएएनएस)। फ्रांस के एवियन शहर में 15 जून से 17 जून के बीच 52वें जी7 देशों की बैठक आयोजित की गई है। सात देशों के इस वैश्विक सम्मेलन में भारत को भी आमंत्रित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें शामिल होंगे। आईएएनएस से बातचीत करते हुए जी7 रिसर्च ग्रुप के प्रमुख विश्लेषक बहराम हाथी ने वैश्विक तनाव के बीच इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण करार दिया।
उन्होंने कहा, ” जी7 नेताओं के बीच होने वाली चर्चाएं केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इसमें अन्य देशों की भागीदारी भी देखने को मिलेगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य पूर्व के कुछ देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होंगे, जो वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।”
विश्लेषक के अनुसार, मौजूदा समय में मुख्य ध्यान शांति और कूटनीतिक समाधान पर रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बैठक से कुछ सकारात्मक कूटनीतिक परिणाम निकल सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब कई क्षेत्रों में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बैठक में कई विषय नए नहीं होंगे। इनमें प्रमुख मुद्दों पर पहले से ही चर्चा चल रही है, जैसे कि क्रिटिकल मिनरल्स का सुरक्षित आपूर्ति तंत्र और भंडारण व्यवस्था। बहराम ने कहा, “जापान की ओर से हाल ही में इस पर एक प्रस्ताव भी सामने आया था कि जी7 देश इन संसाधनों का सामूहिक भंडार बनाएं।”
मध्य पूर्व (या पश्चिम एशिया) की स्थिति भी बैठक का एक महत्वपूर्ण एजेंडा होगी। इस चर्चा में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें डोनाल्ड ट्रंप और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों के प्रतिनिधि भी शामिल बताए जा रहे हैं। जी7 बैठक का उद्देश्य नई घोषणाओं से ज्यादा मौजूदा वैश्विक मुद्दों पर आगे की रणनीति तय करना है। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
वैश्विक शिखर सम्मेलन के प्रमुख सात सदस्य अमेरिका, यूके, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान हैं। इस बार फ्रांस ने भारत सहित ब्राजील, मिस्र, केन्या, दक्षिण कोरिया और कतर आदि को विशेष रूप से आमंत्रित किया है।
–आईएएनएस
केआर/
