नई दिल्ली, (केसरिया न्यूज़)। भारतीय वायुसेना के अधिकारी और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) लगभग न के बराबर होने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को अपनी मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए नियमित रूप से कड़ी एक्सरसाइज करनी पड़ती है।
शुभांशु शुक्ला ने इंस्टाग्राम पर किए पोस्ट में बताया कि पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण हमारे शरीर को लगातार सक्रिय रखता है। हर गतिविधि में शरीर की मांसपेशियों को काम करना पड़ता है, जिससे वे मजबूत बनी रहती हैं। लेकिन अंतरिक्ष में स्थिति बिल्कुल अलग होती है। वहां गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव बेहद कम होने के कारण शरीर की कई मांसपेशियों को सामान्य रूप से काम करने की जरूरत नहीं पड़ती। यदि इस पर ध्यान न दिया जाए तो मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।
उन्होंने बताया कि इसी कारण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्री हर दिन लगभग दो घंटे व्यायाम करते हैं। यह उनकी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिससे शरीर स्वस्थ और सक्रिय बना रहता है।
शुभांशु ने अपने ट्रेनिंग के दौरान हुए एक मजेदार अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लॉन्च से पहले पिछले साल (2025) क्वारंटीन के दौरान उनके कई स्ट्रेंथ टेस्ट किए गए थे।
इन परीक्षणों का उद्देश्य शरीर की शुरुआती स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करना था, ताकि मिशन के बाद डॉक्टर यह समझ सकें कि स्पेस में रहने से शरीर में कितने बदलाव आए।
उन्होंने बताया कि एक टेस्ट के दौरान उनके पैरों और मशीन के बीच एक स्ट्रेंथ गेज लगाया गया था। उन्हें केवल एक पैर से दबाव डालने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उत्साह में उन्होंने दोनों पैरों से जोर लगा दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि मशीन हिल गई और पूरा डेटा बेकार हो गया।
इस घटना के बाद तकनीकी टीम ने अगली बार एक अलग तरीका अपनाया। शुभांशु ने बताया कि अगली कोशिश में उनके फ्लाइट सर्जन स्वयं मशीन के ऊपर बैठ गए, ताकि मशीन अपनी जगह से न हिले और सही आंकड़े दर्ज हो सकें।
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