समुद्री मछली भंडार का आधा हिस्सा हो जाएगा स्थानांतरित


नई दिल्ली, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। जलवायु-परिवर्तन दुनियाभर में समुद्री मछली स्टॉक के वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि इस सदी के अंत तक साझा समुद्री मछली भंडार का लगभग आधा हिस्सा स्थानांतरित हो जाएगा। दुनिया के विशेष आर्थिक क्षेत्रों का एक बड़ा हिस्सा कम-से-कम एक ऐसे परिवर्तन का साक्षी बनेगा।

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने बताया कि किसी को देखते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मत्स्य पालन प्रबंधन उपायों को सुदृढ़ बनाने पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन किया जा रहा है। 17 अक्टूबर हो रहे इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय मत्स्य पालन सुशासन की मुख्यधारा में जलवायु परिवर्तन को शामिल किया जाएगा।

मंत्रालय ने बताया कि समुद्री मछली स्टॉक का यह स्थानांतरण मौजूदा मत्स्य प्रबंधन ढांचे के लिए एक चुनौती है। जलवायु-परिवर्तन साझा मछली भंडार को कैसे प्रभावित करता है, इसकी गहरी समझ मजबूत, जलवायु-परिवर्तन के अनुरूप लचीले अंतर्राष्ट्रीय मत्स्य पालन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। 5 से 9 सितंबर 2022 को रोम में आयोजित मत्स्य पालन समिति (सीओएफआई35) के 35वें सत्र में माना गया कि क्षेत्रीय मत्स्य निकायों (आरएफबी) को जलवायु-परिवर्तन के विषय पर सदस्य देशों के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ना होगा। जलवायु-परिवर्तन को देखते हुए मत्‍स्‍य पालन प्रबंधन पर खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) से दिशा-निर्देश प्रस्‍तुत करने का अनुरोध किया गया।

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने जलवायु-लचीलेपन को देखते हुए दिशा-निर्देशों को स्थितियों के अनुसार परिवर्तित करने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र से क्षेत्रीय मत्स्य निकायों को शामिल करते हुए कार्यशाला आयोजित की है। इस दौरान मत्स्य पालन प्रबंधन और अंतर्राष्ट्रीय मत्स्य पालन गवर्नेंस में जलवायु-परिवर्तन के एकीकरण की रणनीति बनाने पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा। सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत मत्स्य पालन विभाग, इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। एफएओ कार्यशाला के साथ-साथ समुद्री मत्स्य पालन में जलवायु परिवर्तन को अपनाने के लिए भारत की तैयारियों पर एक विचार-मंथन सत्र का भी आयोजन किया जाएगा। यह सत्र 17-18 अक्टूबर 2023 को होगा, जिसमें भारत सरकार और भारत में अन्य एजेंसियों द्वारा की गई प्रमुख पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।

केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री, परशोत्तम रुपाला और मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री, डॉ. एल. मुरुगन, अंतर्राष्ट्रीय मत्स्य पालन सुशासन की मुख्यधारा में जलवायु परिवर्तन को शामिल करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मत्स्य पालन प्रबंधन उपायों को सुदृढ़ बनाने पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्‍मेलन महाबलीपुरम में होगा।

–आईएएनएस

जीसीबी/एसजीके


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